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26 जुलाई को कारगिल की चोटियों पर फिर लहराया था तिरंगा, वो दिन जब भारतीय सेना ने पाकिस्तान को खदेड़ा

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26 जुलाई को कारगिल की चोटियों पर फिर लहराया था तिरंगा, वो दिन जब भारतीय सेना ने पाकिस्तान को खदेड़ा

26 जुलाई को कारगिल की चोटियों पर फिर लहराया था तिरंगा, वो दिन जब भारतीय सेना ने पाकिस्तान को खदेड़ा

Sandeep Sinha
डेस्क रिपोर्टर
Sandeep Sinha

नई दिल्ली। 26 जुलाई भारतीय सेना के पराक्रम और जांबाजी का वो दिन जब भारतीय सेना ने पाकिस्तान को खदेड़ दिया था। इसे हम कारगिल युद्ध के नाम से जानते हैं और हर साल इसे विजय दिवस के रूप में मनाते हैं। 1999 में जब दुश्मन भारत की सीमा में घुस गया था और कई चोटियों पर उसने कब्जा कर लिया था, तब भारतीय जवानों की हिम्मत और दिलेरी ने उसे खदेड़ने का काम किया। क्या था ये कारगिल युद्ध और कैसे भारतीय सेना इस पर विजय प्राप्त की एक नजर डालते हैं…


मई 1999 तक पाकिस्तान की सेना ने कारगिल इलाके की कई चोटियों पर पूरी तरह से कब्जा कर लिया. कुछ चरवाहों ने जब इसकी सूचना भारतीय सेना को दी तो सेना को इस बात का अंदाजा नहीं था कि वाकई में सैकड़ों की संख्या में पाकिस्तानी सैनिक कारगिल पहुंच चुके हैं. इसके बाद भारतीय सेना को लगा कि कुछ आतंकी इस इलाके में घुसपैठ कर आए होंगे, इसकी पुष्टि करने के लिए सेना की तरफ से लेफ्टिनेंट सौरभ कालिया के नेतृत्व में एक टुकड़ी कारगिल की चोटी पर भेजी गई. सबसे पहले सौरभ कालिया ने ही पाकिस्तानी सेना की घुसपैठ की पुख्ता सूचना भारतीय सेना को दी थी। लेफ्टिनेंट सौरभ कालिया ने अपनी टुकड़ी के साथ दुश्मन से भिड़ने का फैसला किया, लेकिन उन्हें भी इस बात का अंदाजा नहीं था, कि दुश्मन इतनी तैयारी के साथ आया है. नतीजा ये रहा कि पाकिस्तानी सेना की गोलीबारी में टुकड़ी में शामिल जवान शहीद हो गए और सौरभ कालिया को पकड़ लिया गया. लेफ्टिनेंट सौरभ कालिया को कई दिनों तक पाकिस्तानी सेना ने टॉर्चर किया और उनके शरीर को पूरी तरह से क्षत-विक्षत कर दिया. पाकिस्तानी सेना उनसे जानकारी चाहती थी, लेकिन सौरभ कालिया ने अपना मुंह नहीं खोला. उनकी आंखें तक निकाल दी गईं. कई दिनों तक टॉर्चर सहने के बाद आखिरकार कालिया देश के लिए शहीद हो गए.


सौरभ कालिया और उनके साथियों के साथ हुए इस बर्ताव के बाद भारतीय सैनिकों का खून खौल उठा, जंग की तैयारी शुरू हुई और अलग-अलग चोटियों पर फतह के लिए टीमें बनाईं गईं। 3 मई 1999 को ऑपरेशन विजय की शुरुआत हुई, भारतीय सेना ने अलग-अलग जगह से कारगिल की चढ़ाई शुरू कर दी. ऊपर से हो रही गोलीबारी में पहले और दूसरे दिन ही भारतीय सेना के कई जवान शहीद हो गए. सबसे बड़ी चुनौती ये थी कि दुश्मन हजारों फीट की ऊंचाई पर मौजूद था और उसके लिए नीचे से आ रही भारतीय सेना को निशाना बनाना काफी आसान था. यही वजह है कि भारतीय सेना को जंग की शुरुआत में काफी ज्यादा नुकसान हुआ. इसके बाद भारतीय सेना ने रणनीति बदली और पीछे से सैनिकों को भेजा गया. कैप्टन विक्रम बत्रा, लेफ्टिनेंट मनोज पांडे, सूबेदार योगेंद्र सिंह यादव और कई बहादुर जवानों के चलते भारत ने कारगिल की तमाम बड़ी चोटियों पर कब्जा कर लिया. कई गोलियां खाने के बाद भी भारतीय सैनिक लगातार लड़ते रहे. करीब 60 दिनों तक चले इस युद्ध में करीब 500 भारतीय सैनिक शहीद हो गए, वहीं पाकिस्तान के 700 से ज्यादा सैनिकों को मौत के घाट उतारा गया. इसके अलावा सैकड़ों आतंकियों को भी ढेर किया गया. 26 जुलाई को भारत की जीत का ऐलान हुआ और कारगिल की चोटियों पर तिरंगे लहराने लगे.

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