
नई दिल्ली। ज्ञानवापी मामले में एएसआई (ASI) की रिपोर्ट को लेकर बड़ा दावा किया गया है। एडवोकेट विष्णु शंकर जैन ने एएसआई की रिपोर्ट पढ़ते हुए कहा है कि एएसआई ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि यह कहा जा सकता है कि यहां जो अभी मस्जिद है। इससे पहले यहां एक काफी बड़ा मंदिर रहा होगा। यह भी कहा गया है कि सर्वे के दौरान देवी-देवताओं की मूर्तियों के निशान भी मिले हैं।
वकील ने कहा कि हिन्दू मंदिर को 17वीं शताब्दी में तोड़कर मस्ज़िद का निर्माण किया गया था। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट में कहा गया है कि मस्ज़िद से पहले उस जगह पर एक हिन्दू मंदिर मौजूद था। हालांकि एएसआई की तरफ से अभी तक आधिकारिक तौर पर कुछ भी नहीं कहा गया है।
ज्ञानवापी मामले में अदालत ने एएसआई के निदेशक को चार अगस्त तक सर्वे के संबंध में रिपोर्ट देने का आदेश दिया था। इसके बाद मामला हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट गया। इसके बाद दोबारा चार अगस्त 2023 से सर्वे शुरू हुआ, जो दो नवंबर तक पूरा हुआ। 18 दिसंबर 2023 को सर्वे रिपोर्ट अदालत में दाखिल की गई थी। इसके बाद से ही हिंदू पक्ष रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग कर रहा था। सर्वे में इस बात का दावा किया गया है कि मस्जिद के पहले यहां मंदिर था और उसकी संरचना के सबूत प्राप्त हुए हैं। हिंदू पक्ष के एक अन्य अधिवक्ता मानबहादुर सिंह ने कहा कि मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाने से वैमनस्यता फैली। यह ऐतिहासिक साक्ष्य है कि आदि विश्वेश्वर का मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाई गई है।
ASI सर्वे रिपोर्ट के प्रमुख बिंदु
पश्चिमी दीवार मंदिर का हिस्सा
शिलापट्टा फारसी में लिखा हुआ है
सर्वे में मिले सनातन के सबूत
कॉरिडोर के बगल में कुआ मिला
शिलापट्टा फारसी में लिखा हुआ है
मस्जिद से पहले भव्य हिंदू मंदिर था
मस्जिद की गुंबद करीब 350 साल पुरानी
हिंदू देवी देवताओं की मूर्ति मिली
हर स्तर पर हर हिस्से का सर्वे हुआ
'मंदिर को तोड़कर बनाई गई ज्ञानवापी मस्जिद'
5 हजार साल पहले दीवार का निर्माण हुआ
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