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TMC में बड़ी टूट के संकेत? ममता की बैठक से 9 विधायक गायब, BJP में जाने की अटकलें तेज

07 मई, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
TMC में बड़ी टूट के संकेत? ममता की बैठक से 9 विधायक गायब, BJP में जाने की अटकलें तेज
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

पश्चिम Bengal की राजनीति में चुनावी हार के बाद अब तृणमूल कांग्रेस के भीतर हलचल तेज हो गई है। भाजपा से करारी हार झेलने के बाद पार्टी अभी संभल भी नहीं पाई थी कि अब विधायकों के संभावित बगावती तेवर चर्चा में आ गए हैं। सबसे ज्यादा हलचल उस वक्त मची, जब ममता बनर्जी की अहम बैठक से 9 नवनिर्वाचित विधायक गायब मिले। इसके बाद राजनीतिक गलियारों में दल-बदल की अटकलें और तेज हो गई हैं।


ममता की बैठक में 80 में से सिर्फ 71 विधायक पहुंचे

बुधवार को दक्षिण कोलकाता स्थित कालीघाट आवास पर ममता बनर्जी ने नवनिर्वाचित विधायकों की अहम बैठक बुलाई थी। इस बैठक में कुल 80 विधायकों को शामिल होना था, लेकिन केवल 71 विधायक ही पहुंचे। टीएमसी नेतृत्व ने सफाई दी कि कुछ विधायक चुनाव के बाद हुई हिंसा को नियंत्रित करने में व्यस्त थे, जबकि उत्तर बंगाल के कुछ नेताओं को वहीं रुकने को कहा गया था। लेकिन हार के तुरंत बाद हुई इस पहली बड़ी बैठक से इतने विधायकों का गायब रहना सवाल खड़े कर रहा है।


‘पार्टी के अंदर से मिला धोखा’

बैठक के दौरान ममता बनर्जी ने अपनी ही पार्टी के कुछ नेताओं पर अंदरूनी धोखे का आरोप लगाया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि पार्टी को नुकसान पहुंचाने वालों की पहचान की जाएगी और कार्रवाई भी होगी। सूत्रों के मुताबिक, ममता ने विधायकों और नेताओं को चेतावनी दी कि पार्टी या शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ किसी भी तरह की नाराजगी सार्वजनिक रूप से बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इससे साफ संकेत मिले कि पार्टी नेतृत्व संभावित बगावत को लेकर सतर्क हो चुका है।


अनुशासन समिति बनाई गई

टीएमसी ने अंदरूनी शिकायतों और भितरघात की जांच के लिए तुरंत एक अनुशासनात्मक समिति का गठन किया है। इसमें डेरेक ओ ब्रायन, फरहाद हकीम, चंद्रिमा भट्टाचार्य और असिमा पात्रा को शामिल किया गया है। पार्टी का दावा है कि चुनाव के दौरान संगठन के भीतर से हुई गतिविधियों की जांच की जाएगी। साथ ही अशांति प्रभावित जिलों में फैक्ट फाइंडिंग टीमें भी भेजी जा रही हैं।


पार्टी नेताओं के अलग-अलग बयान से बढ़ी मुश्किल

चुनाव हार के बाद टीएमसी के भीतर मतभेद भी खुलकर सामने आने लगे हैं। अभिनेता और सांसद देव ने सोशल मीडिया पर भाजपा को जीत की बधाई देते हुए इसे जनता का जनादेश बताया। वहीं, शत्रुघ्न सिन्हा जैसे नेता चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठा रहे हैं। पार्टी को बाद में सफाई देनी पड़ी कि देव की टिप्पणियां उनके निजी विचार हैं। इससे यह संकेत मिला कि हार के बाद पार्टी के भीतर एकजुटता कमजोर पड़ती दिख रही है।


ममता का सख्त संदेश: ‘इस्तीफा नहीं दूंगी’

ममता बनर्जी ने साफ कर दिया है कि वह हार के बावजूद मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा नहीं देंगी। उन्होंने चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि टीएमसी के पास अदालत में चुनौती देने के लिए “ठोस सबूत” मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर अंतरराष्ट्रीय मंचों तक भी जाया जाएगा। ममता ने विधायकों से विधानसभा के पहले दिन काले कपड़े पहनकर विरोध दर्ज कराने को भी कहा है।


‘यह काला दिन हो’: ममता बनर्जी

बैठक में ममता ने कहा, “हम जनता के जनादेश का सम्मान करते हैं, लेकिन मैं इस्तीफा नहीं दूंगी। उन्हें मुझे बर्खास्त करने दीजिए। मैं चाहती हूं कि यह एक काला दिन हो।” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि चुनाव के बाद विपक्षी दलों ने टीएमसी के 1,500 पार्टी कार्यालयों और लेनिन की प्रतिमा को नुकसान पहुंचाया है।


अब सबसे बड़ा सवाल क्या?

फिलहाल टीएमसी नेतृत्व डैमेज कंट्रोल में जुटा है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल उन 9 गायब विधायकों को लेकर बना हुआ है। अगर इनमें से कोई भी विधायक भाजपा का दामन थामता है, तो यह चुनावी हार के बाद टीएमसी के लिए दूसरा बड़ा झटका साबित हो सकता है। यही वजह है कि बंगाल की राजनीति में अब नजर सिर्फ एक चीज पर टिकी है—क्या TMC अपने विधायकों को एकजुट रख पाएगी या पार्टी में बड़ी टूट होने वाली है?

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