N
डेस्क रिपोर्टर
दिल्ली न्यूज वर्ल्ड डेस्क। हर साल 14 नवंबर को बाल दिवस मनाया जाता है। इस दिन को भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के जन्मदिन पर मनाया जाता है। बाल दिवस को देश में पहली बार सन 1959 में मनाया गया था। यह दिन बच्चों के लिए बेहद खास होता है। आसान शब्दों में कहा जाए तो इस दिन को बच्चों का दिन भी कहा जाता है। विभिन्न देशों में बाल दिवस को अलग-अलग प्रकार से मनाया जाता है। पंडित जवाहरलाल नेहरू को बच्चों से बहुत प्यार था। उनका मानना था कि बच्चे भगवान का रूप होते हैं। चाचा नेहरू बच्चों को प्यार से गुलाब का फूल भी कहते थे, बच्चे भी उनसे बेहद प्यार करते हैं और बच्चे प्यार से उन्हें चाचा नेहरू कहते थे। चाचा नेहरू का कहना था कि देश के स्वर्णिम विकास में बच्चे की अहम भुमिका होती है जिसके लिए बच्चों को शिक्षित करना बहुत जरूरी है। आइए, जानते है बाल दिवस का इतिहास
क्या है बाल दिवस का इतिहास
इतिहासकारों के अनुसार वर्ष 1925 में बाल कल्याण के लिए विश्व सम्मेलन में बाल दिवस मनाने का प्रस्ताव पेश किया गया था। इसके बाद सन 1 जून, 1950 से बाल दिवस को मानना शुरू हो गया। जिस के बाद वर्ष 1954 में बाल दिवस मनाने के प्रस्ताव को सर्वसम्मिति से पास कर दिया।
बतादें कि, साल 1959 में संयुक्त राष्ट्र संघ ने बाल अधिकार के घोषणापत्र को स्वीकार कर लिया था और वर्ष 1989 में उसे स्वीकार कर लिया। खेर दुनियाभर में तो 20 नवंबर को बाल दिवस के रूप में मनाया जाता है। वहीं भारत कि बात करे तो यहां 14 नवंबर को बाल दिवस मनाया जाता है। 14 नवंबर को चाचा नेहरू का जन्मदिन भी आता है जिसमे चाचा नेहरू अपने जन्मदिन को बच्चों के दिन के रूप में मनाते है। यही कारण है भारत में 14 नंवबर को बाल दिवस मनाया जाता है।
क्या महत्व है बाल दिवस का
बाल दिवस का भारत में बहुत महत्व है। बच्चों को देश का भविष्य माना जाता है। इसलिए देश के स्वर्णिम विकास के लिए बच्चों का विक्षित होना भी जरूरी है। 14 नवंबर यानी आज के दिन स्कूल और कालेजों में सांस्कृतिक कार्यक्रम को आयोजित किया जाता है। इन कार्यक्रमों में बच्चों को जागरुक करने के साथ साथ कई संस्कृति कार्यक्रम किए जाते है। साथ ही इस दिन चाचा नेहरू को याद कर श्रद्धांजलि भी दी जाती है।
पाठकों की राय (0)
इस खबर पर अभी कोई कमेंट नहीं है। पहले आप लिखें!

