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ट्रंप बना रहे दुनिया की 5 सबसे बड़ी ताकतों का नया ग्रुप, भारत भी होगा इस सुपरपावर टेबल का पार्टनर

12 दिस, 20250 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
ट्रंप बना रहे दुनिया की 5 सबसे बड़ी ताकतों का नया ग्रुप, भारत भी होगा इस सुपरपावर टेबल का पार्टनर

ट्रंप बना रहे दुनिया की 5 सबसे बड़ी ताकतों का नया ग्रुप, भारत भी होगा इस सुपरपावर टेबल का पार्टनर

Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

दुनिया की राजनीति में एक ऐसा धमाका होने वाला है, जिसकी गूँज आने वाले दशकों तक सुनाई दे सकती है! अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक ऐसा क्लब बना रहे हैं जो दुनिया की ताकतों का पूरा समीकरण बदल देगा। नाम है—“C5” यानी Core-5। इसमें सिर्फ वही देश बैठेंगे जिनके पास है असली ताकत: विशाल आबादी, विशाल सेना और विशाल अर्थव्यवस्था। और सबसे खास—भारत इस एलिट लिस्ट का हिस्सा होगा!


ट्रंप का नया सुपरपावर क्लब — C5 क्या है?

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक नए और बेहद ताकतवर ग्रुप Trump Superpower Club की तैयारी कर रहे हैं। इसका प्रस्तावित नाम है “C5 Group” यानी Core-5। इसमें शामिल होंगे सिर्फ 5 देश— अमेरिका, भारत, चीन, रूस और जापान। इस क्लब में पैसे या लोकतंत्र की कोई अनिवार्यता नहीं होगी। बस तीन बातें देखी जाएँगी— बड़ी आबादी, मजबूत सेना और ताकतवर अर्थव्यवस्था। विशेषज्ञ इसे G7 का संभावित रिप्लेसमेंट (G7 Replacement) मान रहे हैं। हालांकि व्हाइट हाउस ने यह कहकर इनकार किया है कि ऐसा कोई “दूसरा पेपर” है ही नहीं, लेकिन अमेरिकी मीडिया का दावा है कि यह विचार ट्रंप की नई सुरक्षा नीति के गुप्त ड्राफ्ट में मौजूद था।


पहली मीटिंग में क्या होगा? — इजरायल-सऊदी केंद्र में

C5 की पहली बैठक का फोकस होगा ‘मध्य-पूर्व की सुरक्षा।’ विशेषकर इजरायल और सऊदी अरब को करीब लाना


भारत के लिए क्यों खास?

भारत की 140 करोड़ की आबादी, तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था और बढ़ती सैन्य शक्ति के कारण भारत क्लब में बराबरी का पार्टनर माना जा रहा है।


क्या रूस और चीन को ज़्यादा ताकत मिल जाएगी?

यूरोप के विशेषज्ञों में चिंता है की, इससे रूस की ताकत बढ़ेगी और नाटो कमजोर पड़ सकता है। चीन-जापान का पुराना तनाव भी सबको याद है। भारत-चीन सीमा विवाद भी बड़ी चुनौती है। फिर भी, अगर यह क्लब बन गया तो दुनिया की पावर स्ट्रक्चर पूरी तरह बदल जाएगी।


ट्रंप की नीतियों से भारत-अमेरिका रिश्ते कैसे बिगड़े थे?

ट्रंप के दूसरे कार्यकाल (2025) की शुरुआत में ही भारत–अमेरिका संबंधों में दरार आ गई थी।

कारण:

‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति

भारत पर टैरिफ का दबाव

रूस से भारत के तेल आयात को मुद्दा बनाना

अमेरिका ने आरोप लगाया कि भारत ने रूस से $56 बिलियन का तेल खरीदकर पश्चिमी दबाव को नजरअंदाज किया।


ट्रंप ने भारत पर टैरिफ की बौछार कर दी थी

ट्रंप ने भारत पर 25% रिसिप्रोकल टैरिफ लगाया, रूसी तेल पर अतिरिक्त 25% पैनल्टी लगाई। कुल मिलाकर भारत पर 50% तक का सबसे भारी टैरिफ। H-1B वीजा फीस $100,000 कर दी। अपने ट्वीट में भारत को “Dead Economy” कहा, इससे दोनों देशों में एक तरह की Mini Trade War शुरू हो गई थी। अब ट्रंप का रुख बदला लगता है, लेकिन यह कितना टिकेगा—यह आने वाला वक्त बताएगा।


क्या भारत अब वाकई सुपरपावर बनने वाला है?

ट्रंप पहले भी कह चुके हैं “G7 पुराना हो चुका है… अब असली बड़े देशों को एक साथ बैठाना होगा।” भारत के लिए यह ऐतिहासिक मौका होगा। भारत पहली बार अमेरिका, रूस, चीन और जापान जैसे चार महाशक्तियों के साथ एक ही मेज पर बराबरी से बैठेगा। सरकार की ओर से अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं आया, लेकिन पीएम मोदी और ट्रंप की हालिया बातचीत में दोनों देश काफी नजदीक दिखे।


ट्रंप की मंशा—पुराने क्लब तोड़कर दुनिया का सबसे ताकतवर नया क्लब

ट्रंप अब वो क्लब बनाना चाहते हैं, जिसमें सिर्फ असली ताकत हो। ना लोकतंत्र की शर्त, ना पूंजी की… सिर्फ पावर! भारत इसमें बड़ी भूमिका निभा सकता है। यह सपना हकीकत बनेगा या नहीं— आने वाला समय ही तय करेगा। लेकिन इतना तो तय है— दुनिया की राजनीति में नया महायुद्ध नहीं, बल्कि ‘महा-खेल’ शुरू होने वाला है!

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