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डेस्क रिपोर्टर
लखनऊ, न्यूज़ वर्ल्ड डेस्क। उत्तरप्रदेश विधानसभा चुनाव अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। 403 विधानसभा सीटों में से 292 सीटों पर पांच चरणों में वोटिंग हो चुकी है। अब छठवें और सातवें चरण में बाकी बची 111 सीटों पर मतदान होना है। छठवां चरण 3 मार्च को है जबकि सातवां चरण 7 मार्च को। इन दो चरणों में कई दिग्गज भी मैदान में हैं सीएम योगी आदित्यनाथ भी गोरखपुर सीट से मैदान में हैं जहां छठवें चरण में 3 मार्च को वोट डाले जाने हैं।
दो चरणों का चुनावी गणित
छठे चरण की 57 और सातवें चरण की 54 विधानसभा सीटों के साथ प्रदेश की बची 111 विधानसभा सीटों का चुनाव प्रदेश के बाईस का बादशाह का भविष्य लिखने वाला है। यही कारण है कि सभी राजनैतिक दलों ने अंतिम दौर के इस चुनाव के लिए पूरी ताकत झोंक दी है। पीएम नरेन्द्र मोदी,केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के साथ साथ केन्द्रीय मंत्रिमंडल के नेताओं ने पूर्वांचल में पूरी ताकत झोंक दी हैं। इसके अलावा मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी यहां कई सभाओं को संबोधित कर बीजेपी प्रत्याशी के पक्ष में वोट की अपील की।
वहीं सपा सुप्रीमों अखिलेश यादव, बसपा सुप्रीमों मायावती और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी पूरी जोर आजमाईश कर रहे हैं। कांग्रेस अंतिम चरण के इस चुनाव में दर्जन भर सीटे जीतने का दावा कर रही है। वहीं बसपा के लिए भी यह चरण काफी अहम माना जा रहा है। हालांकि पूरे चुनाव पर नजर डाली जाए तो बसपा का वो फ्लो पूरे चुनाव में नहीं दिखा जिसके लिए उत्तरप्रदेश में बसपा को जाना जाता है।
छठवें चरण में सीएम योगी आदित्यनाथ की अग्निपरीक्षा
छठवें चरण में 10 जिलों की 57 विधानसभा सीटों का चुनाव मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गढ़ में होने जा रहा है। इसमें दर्जनों विधानसभा सीटों पर सीएम योगी के चहेतों को मैदान में उतारा गया है। अखिलेश यादव इस चरण के लिए पूरा जोर लगा रहे हैं। सपा सुप्रीमों अखिलेश यादव ने गोरखपुर शहर सीट से बीजेपी नेता स्व.उपेन्द्र दत्त शुक्ला की पत्नी सुभावती शुक्ला सीएम योगी के खिलाफ मैदान में हैं। गोरखपुर चुनाव को लेकर अखिलेश यादव ने सहयोगियों को भी खास तौर पर लगाया है। बसपा के ख्वाजा समशुद्दीन,भीम आर्मी के चंद्रशेखर आजाद भी ताल ठोक रहे हैं।
दोनों चरणों में जातिवाद हावी रह सकता है
छठवें और सातवें चरण का चुनाव जातिवाद या सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की भी प्रयोगशाला बन सकता है। सातवें चरण में 9 जिलों की 54 विधानसभा सीटों पर 2017 के विधानसभा चुनाव को छोड़ दिया जाए तो जातिगत समीकरण 90 के दशक से हमेशा प्रभावी रहा है। राजनैतिक पंडित इस चुनाव में मुख्य मुकाबला बीजेपी और सपा के बीच ही मान रहे हैं।
पीएम नरेन्द्र मोदी ने खेला इमोशनल कार्ड
बनारस की ओर बढ़ रहे विधानसभा चुनाव से पहले पीएम नरेन्द्र मोदी का फोकस भी पूरी तरह पूर्वांचल की ओर हैं। अपने संसदीय क्षेत्र बनारस में मतदान से पहले वो खुद यहां ज्यादा वक्त दे रहे हैं। इसी को लेकर रविवार को वो वाराणसी पहुंचे थे और यहां उन्होनें इमोशनल कार्ड खेला। उन्होने अपने कार्यकर्ताओं की बीच कहा कि काशी आने पर मेरी मृत्यु की कामना की गई, पर इससे मुझे बड़ा सुकून मिला। मैं यह कहना चाहता हूं कि मैं अंतिम सांस तक काशी के विकास के लिए काम करता रहूंगा। जिंदा शहर बनारस मुक्ति का रास्ता खोलता है, लेकिन परिवारवादी इसे नहीं समझ सकते।
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