लखनऊ, न्यूज़ वर्ल्ड डेस्क। उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव की रणभेरियों की आवाज दिन प्रतिदिन तेज होती जा रही हैं और उस बीच देश के आर्थिक , ताकतवर एवं कथित किसानों के भेष में समय-समय पर रंग बदलने वालों की आंखों में चुभने वाली मोदी सरकार द्वारा किसान हित में बनाए गए कृषि कानून का वापस होना लगता है जैसे आज किसानों के लिए काला दिन है और यह भी सोचने को मजबूर करता है क्या इस कानून पर नरेंद्र मोदी जैसे अजेय जननायक को किसानों के नाम पर समूचे देश एवं किसानों को गुमराह कर रहे स्वार्थी एवं संपन्न लोगों ने मजबूर कर दिया अथवा उत्तर प्रदेश चुनाव नामक एक ऐसा मोड़ आया जिसने मोदी के लिए सियासी सोच जनहित से ज्यादा बड़ी बना दी,अब किसानों का भविष्य इस कानून के लौटने के बाद कैसा होगा इसका जवाब तो किसान ही भविष्य में देंगे क्योंकि अपने हित के लिए बने कानून के हित में जब आप ही नहीं खड़े हो सकते तो आपकी आवाज कोई क्यों उठाएगा।
अब दूसरा सवाल यह उठता है क्या कानून वापस लेने में सरकार को कोई लाभ दिखाई दिया क्योंकि सियासत दान बिना लाभ किसी विषय पर चर्चा करना तो दूर ध्यान भी नहीं देते।
वैसे तो इस बात पर गौर करते हैं तो इस बात में भी दम नजर आती है क्योंकि 2022 की शुरुआत में ही उत्तर प्रदेश जैसे महत्वपूर्ण राज्य का सुना है और उसमें पश्चिमी उत्तर प्रदेश कि लगभग 18 लोकसभा सीट और विधानसभा की लगभग 100 सीटों पर जाटों का खासा महत्व है और उन पर अखिलेश यादव समाजवादी पार्टी एवं जयंत चौधरी राष्ट्रीय लोक दल का गठबंधन आगामी चुनावों में बीजेपी के पेशानी पर बल ला सकता है लेकिन कृषि कानून में सरकार का सक्रिय विरोध करते करते टिकैत नंदन राकेश लोगों में बतौर किसान नेता अपनी पैठ बना चुके हैं , और वे इसका सियासी लाभ उत्तर प्रदेश की आगामी चुनावों में लेना भी चाहेंगे और उसके लिए उन्हें चुनावी साथी भी चाहिए होगा अगर दूर दृष्टि का सहारा लिया जाए तो टिकैत के लिए भी बीजेपी से ज्यादा मुफीद साथी कोई और अन्य नजर नहीं आता वैसे भी टिकैतऔर योगी दूर दृष्टाओं को पिछले कुछ समय से हमकदम नजर आते हैं , इसकी बानगी सभी ने पिछले दिनों लखीमपुर खीरी में देखी थी , जब वे विरोध की भाषा बोलते हुए भी उत्तर प्रदेश सरकार के संकटमोचक साबित हुए थे , वैसे भी सियासी हलकों में यह बात बहुत पहले से अपनी पैठ बना चुकी है ,कि राकेश टिकैत उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष तथा उत्तर प्रदेश में ठाकुरों के सर्वमान्य नेता राजनाथ सिंह के दरबार में खास स्थान रखते हैं।