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30 नवंबर के बाद हट सकता है अमेरिका का कड़ा टैरिफ! – CEA का बड़ा संकेत, भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता में नई उम्मीद

18 सित, 20250 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
30 नवंबर के बाद हट सकता है अमेरिका का कड़ा टैरिफ! – CEA का बड़ा संकेत, भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता में नई उम्मीद

30 नवंबर के बाद हट सकता है अमेरिका का कड़ा टैरिफ! – CEA का बड़ा संकेत, भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता में नई उम्मीद

Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच चल रही व्यापारिक बातचीत से देश की अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी राहत की उम्मीद जगी है। मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) वी अनंत नागेश्वरन ने साफ संकेत दिए कि अमेरिका द्वारा भारत पर लगाए गए 25% दंडात्मक टैरिफ (Penal Tariff) 30 नवंबर 2025 के बाद हट सकता है। यह बयान ऐसे समय आया है जब दोनों देशों के बीच हाई-लेवल ट्रेड वार्ता जारी है और कारोबारी दुनिया अमेरिकी टैरिफ को लेकर चिंतित थी।


नवंबर के बाद हट सकता है दंडात्मक टैरिफ

कोलकाता में Merchants’ Chamber of Commerce & Industry के कार्यक्रम में नागेश्वरन ने कहा, “25 प्रतिशत के मूल रेसिप्रोकल टैरिफ और 25 प्रतिशत के दंडात्मक टैरिफ दोनों अप्रत्याशित थे। लेकिन हाल के भू-राजनीतिक हालात और ताज़ा घटनाक्रम को देखते हुए मेरी सहज धारणा है कि 30 नवंबर के बाद दंडात्मक टैरिफ नहीं रहेगा।” उन्होंने आगे जोड़ा, “मुझे विश्वास है कि अगले कुछ महीनों में दंडात्मक टैरिफ और उम्मीद है कि पारस्परिक (Reciprocal) टैरिफ पर भी समाधान आ जाएगा।”


भारत का एक्सपोर्ट ग्रोथ – 1 ट्रिलियन की राह पर

मुख्य आर्थिक सलाहकार ने कहा कि भारत का वार्षिक निर्यात (Exports) फिलहाल 850 बिलियन अमेरिकी डॉलर के करीब है और यह 1 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने की दिशा में है। यह देश की GDP का लगभग 25 प्रतिशत है, जो एक स्वस्थ और खुली अर्थव्यवस्था को दर्शाता है।


ट्रंप युग की टैरिफ पॉलिसी की याद

नागेश्वरन ने याद दिलाया कि पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने International Emergency Economic Powers Act (IEEPA), 1977 का इस्तेमाल कर कई देशों पर रेसिप्रोकल टैरिफ लगाए थे। उस समय भारत को 25% टैरिफ का सामना करना पड़ा था, जिसे बाद में 50% तक बढ़ा दिया गया था।


क्या मतलब है भारत के लिए?

अगर अमेरिका दंडात्मक टैरिफ हटाता है तो भारतीय निर्यातकों को बड़ी राहत मिलेगी। खासकर स्टील, एल्युमिनियम और अन्य प्रमुख निर्यात क्षेत्रों को सीधा फायदा होगा। इससे भारत-अमेरिका व्यापार संबंध और मजबूत होंगे और विदेशी निवेशकों का भरोसा भी बढ़ेगा।

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