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इस बार उत्तर प्रदेश में ब्राह्मण और युवा बनाएंगे मुख्यमंत्री

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इस बार उत्तर प्रदेश में ब्राह्मण और युवा बनाएंगे मुख्यमंत्री

इस बार उत्तर प्रदेश में ब्राह्मण और युवा बनाएंगे मुख्यमंत्री

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डेस्क रिपोर्टर

लखनऊ, न्यूज़ वर्ल्ड डेस्क। यूपी में चुनाव का बिगुल फूंका जा चुका है। तारीखों का ऐलान भी हो चुका है, लेकिन इस बात पर सबकी नजर है कि इस बार चुनाव में कौन सा वर्ग भारी पड़ेगा और कौन सा वर्ग जीत दिलाने में सहायक होगा। गौरतलब है कि यूपी में भाजपा के साथ क्षेत्रीय दलों का भविष्य भी दांव पर है। भाजपा ने 2014 से लेकर 2019 के आम चुनाव तक मतों के चरम को छुआ है, अब इस रिकॉर्ड को कायम करने की चुनौती भी बीजेपी के सामने है। यूपी में जातीय धार्मिक समीकरण ही तय करते हैं कि सरकार किसकी बनने वाली है, लेकिन इस बार माहौल अलग है। आइए जानते हैं वह तीन इफेक्ट कौन से हैं जो चुनाव में बड़ा उलटफेर कर सकते हैं।a

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कहा जाता है कि उत्तर प्रदेश का चुनाव देश की राजनीति को तय करता है। देश की राजनीति किस दिशा में चलेगी यह उत्तर प्रदेश का चुनाव बता देता है। लेकिन इस बार उत्तर प्रदेश के चुनाव में 3 बड़े साइलेंट फैक्टर है, जो चुनाव में बड़ा उलटफेर कर सकते हैं।

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पहला ब्राह्मण फैक्टर

उत्तर प्रदेश के चुनाव में सबसे बड़े किंग मेकर के रूप में इस बार ब्राह्मण समुदाय रह सकता है। क्योंकि प्रदेश में 12% आबादी ब्राह्मण समाज की है, वही 56 विधायक ब्राह्मण है, तो यूपी में 19% स्वर्ण है। विधानसभा में इसका प्रतिनिधित्व 44% करते हैं। सूबे में 56 ब्राह्मण विधायक हैं, इनमें 46 भाजपा से हैं। वह 2012 की तुलना में 12% अधिक था और 1980 के बाद सबसे अधिक संख्या में स्वर्ण विधानसभा पहुंचे हैं। 2007 में भाजपा ने भी ब्राह्मण और दलितों की सोशल इंजीनियरिंग के दम पर सत्ता हासिल की थी। इसके साथ ही 86 ब्राह्मणों को टिकट दिया गया था, जिसमें से 57 विधायक जीतकर सदन पहुंचे थे। सुबह में सपा ब्राह्मणों को लुभाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ रही है। दूसरी तरफ ब्राह्मणों की नाराजगी दूर करने के लिए भाजपा हर संभव कोशिश कर रही है। 


दूसरा फैक्टर महिला और युवा

उत्तर प्रदेश के चुनाव में युवा और महिला निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। राज्य में 18 से 19 आयु वर्ग के 2000000 मतदाता हैं, इसमें 10.6 दो लाख पुरुष व 9.27 लाख महिलाएं हैं। कुल 15.2 करोड़ वोटर में से 45% 18 से 40 साल के हैं। इसके अलावा दूसरा फेक्टर महिला वोटर्स का है। 2012 और 2017 के चुनाव में महिला वोटर्स ने पुरुषों से ज्यादा वोट डाले थे। कांग्रेस ने 40% महिला उम्मीदवारों को टिकट देने का बड़ा सियासी दांव भी खेला था। भाजपा ने उज्ज्वला योजना, शौचालय निर्माण पक्का घर मुफ्त राशन के जरिए इन्हें साधने की कोशिश की है। यूपी की अधिकांश पार्टियों ने इसके लिए बड़ी घोषणाएं भी की है।


तीसरा और अहम फैक्टर है मुस्लिम वोटर

यूपी में मुस्लिम समाज भी इस चुनाव में बड़ी भूमिका निभाएगा। 143 सीटें ऐसी हैं जहां पर मुस्लिम आबादी 20 से 45% तक है। योग्य चुनाव में हंसासर डालती है। 2012 में इनमें से 60% सीटें जीतकर सपा ने सरकार बनाई थी। 2017 में एनडीए ने इनमें से 111 सीटें जीती थी। राजनीतिक विशेषज्ञों की मानें तो तीन तलाक जैसे सुधार के चलते भाजपा को बड़ी संख्या में मुस्लिम महिलाओं का वोट मिला था। मुस्लिम सपा बसपा कांग्रेस और भाजपा में बंटे है।


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