
नई दिल्ली। 15 साल की उम्र में रिकॉर्ड, अवॉर्ड और अब मैनेजमेंट रिसर्च। भारतीय क्रिकेट के उभरते सितारे वैभव सूर्यवंशी अब सिर्फ मैदान पर ही नहीं, बल्कि देश के शीर्ष प्रबंधन संस्थानों की पढ़ाई का भी हिस्सा बनने जा रहे हैं। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (IIM) इंदौर ने वैभव पर देश की पहली मल्टी-डिसिप्लिनरी केस स्टडी शुरू करने का फैसला लिया है। इस अध्ययन का मकसद यह समझना है कि कम उम्र में असाधारण सफलता हासिल करने वाली प्रतिभाओं के पीछे कौन से कारक काम करते हैं।
क्या होगा ‘वैभव मॉडल’ में खास?
IIM इंदौर इस अध्ययन के तहत केवल वैभव की बल्लेबाजी या आंकड़ों का विश्लेषण नहीं करेगा, बल्कि उनके विकास से जुड़े सामाजिक, मनोवैज्ञानिक, पारिवारिक और संस्थागत पहलुओं को भी समझेगा। संस्थान का मानना है कि इतनी कम उम्र में शीर्ष स्तर का प्रदर्शन केवल प्रतिभा का परिणाम नहीं होता, बल्कि इसके पीछे परिवार, कोचिंग, मानसिक मजबूती और सही मार्गदर्शन की भी बड़ी भूमिका होती है।
IIM डायरेक्टर ने बताई स्टडी की वजह
IIM इंदौर के डायरेक्टर हिमांशु रॉय के मुताबिक, वैभव की यात्रा उन युवाओं के लिए प्रेरणा है जो बड़े सपने देखते हैं। उन्होंने कहा कि प्रतिभा जन्मजात हो सकती है, लेकिन उसे लंबे समय तक उत्कृष्ट प्रदर्शन में बदलने के लिए अनुशासन, मजबूत सपोर्ट सिस्टम, संतुलित सोच और नेतृत्व क्षमता की जरूरत होती है। यही पहलू इस स्टडी का केंद्र होंगे।
0.3 सेकंड में फैसला, यही बनाता है खास
वैभव की बल्लेबाजी का सबसे चर्चित पहलू उनका बेहद तेज निर्णय लेने का कौशल है। विशेषज्ञों के मुताबिक, वे गेंद की दिशा और शॉट चयन का फैसला करीब 0.3 सेकंड में कर लेते हैं। यही वजह है कि गेंदबाजों को रणनीति बदलने का मौका नहीं मिलता। उनकी बैट स्पीड, टाइमिंग और दबाव में भी संतुलन बनाए रखने की क्षमता उन्हें बाकी खिलाड़ियों से अलग बनाती है।
कोच और मेंटर्स का भी होगा विश्लेषण
बचपन के कोच मनीष ओझा से लेकर राजस्थान रॉयल्स के क्रिकेट विकास प्रमुख जुबिन भरूचा और कोच विक्रम राठौर तक, सभी ने वैभव की तकनीक को निखारने में भूमिका निभाई है। स्टडी यह समझने की कोशिश करेगी कि किसी युवा खिलाड़ी की सफलता में कोचिंग और मेंटरशिप कितनी महत्वपूर्ण होती है।
सफलता के साथ आने वाले दबाव पर भी फोकस
IIM की रिसर्च केवल उपलब्धियों तक सीमित नहीं रहेगी। अध्ययन में कम उम्र में मिलने वाली प्रसिद्धि, करोड़ों की कमाई, सोशल मीडिया दबाव और मानसिक स्वास्थ्य जैसे मुद्दों का भी विश्लेषण किया जाएगा। हिमांशु रॉय का कहना है कि कई प्रतिभाएं शुरुआती सफलता के बाद अपेक्षाओं के बोझ तले दब जाती हैं। इसलिए ऐसे मॉडल की जरूरत है जो टैलेंट को लंबे समय तक स्थिर और सफल बनाए रख सके।
कॉरपोरेट सेक्टर को भी मिलेगा नया मॉडल
यह स्टडी केवल खेल जगत के लिए नहीं होगी। IIM का मानना है कि इससे कॉरपोरेट दुनिया को भी टैलेंट पहचानने और उसे विकसित करने का नया दृष्टिकोण मिलेगा। यानी वैभव सूर्यवंशी का मॉडल भविष्य में कंपनियों और नीति-निर्माताओं के लिए भी उपयोगी साबित हो सकता है।
IPL 2026 में रिकॉर्ड पर रिकॉर्ड
वैभव सूर्यवंशी का IPL 2026 सीजन ऐतिहासिक रहा। उन्होंने 16 पारियों में 776 रन बनाए और टूर्नामेंट के सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज बने। उनका औसत 48.50 और स्ट्राइक रेट 237.30 रहा, जो टूर्नामेंट के सबसे प्रभावशाली आंकड़ों में शामिल है। इस प्रदर्शन के दम पर उन्होंने ऑरेंज कैप अपने नाम की।
72 छक्कों से तोड़ा क्रिस गेल का रिकॉर्ड
वैभव ने पूरे सीजन में 72 छक्के लगाए, जो IPL इतिहास में एक सीजन का नया रिकॉर्ड है। इससे पहले यह उपलब्धि क्रिस गेल के नाम थी, जिन्होंने एक सीजन में 59 छक्के जड़े थे। वैभव ने न केवल यह रिकॉर्ड तोड़ा, बल्कि 'सुपर स्ट्राइकर ऑफ द सीजन' और 'इमर्जिंग प्लेयर ऑफ द सीजन' जैसे सम्मान भी हासिल किए।
क्यों खास है यह रिसर्च?
क्रिकेट में रिकॉर्ड बनना आम बात है, लेकिन किसी 15 वर्षीय खिलाड़ी की सफलता को समझने के लिए देश के प्रतिष्ठित मैनेजमेंट संस्थान का रिसर्च शुरू करना असाधारण है। यही वजह है कि अब वैभव सूर्यवंशी सिर्फ क्रिकेट का नाम नहीं, बल्कि टैलेंट डेवलपमेंट, नेतृत्व और सफलता के अध्ययन का नया मॉडल बनने जा रहे हैं।
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