
तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा बदलाव होता नजर आ रहा है। अभिनेता से नेता बने Vijay के मुख्यमंत्री बनने की संभावना अब काफी मजबूत मानी जा रही है। सूत्रों का दावा है कि उनकी पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) को कई दलों का समर्थन मिल गया है। अगर यह समर्थन औपचारिक रूप से मिल जाता है, तो TVK राज्य में सरकार बनाने के लिए जरूरी बहुमत का आंकड़ा पार कर लेगी। इसी वजह से चेन्नई से लेकर दिल्ली तक राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।
राज्यपाल से तीसरी बार मिलने की कोशिश
TVK प्रमुख विजय ने शुक्रवार को लगातार तीसरे दिन राज्यपाल R. N. Ravi से मिलने का समय मांगा है। इससे पहले 6 और 7 मई को भी वे राजभवन पहुंचे थे। हालांकि, दोनों बार राज्यपाल ने उनसे सरकार बनाने के लिए जरूरी 118 विधायकों का समर्थन पत्र लाने को कहा था। अब दावा किया जा रहा है कि विजय बहुमत के बेहद करीब पहुंच चुके हैं।
कैसे जुटा बहुमत का आंकड़ा
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में TVK ने 108 सीटें जीती थीं। इसके बाद कांग्रेस के 5 विधायक पहले ही विजय को समर्थन देने का ऐलान कर चुके हैं। अब सूत्रों के मुताबिक, Communist Party of India के 2 विधायक, Communist Party of India (Marxist) के 2 विधायक और VCK के 4 विधायक भी समर्थन देने को तैयार हैं। इससे TVK का आंकड़ा सीधे 121 सीटों तक पहुंच सकता है।
DMK-AIADMK गठबंधन की खबरों से बढ़ी हलचल
राज्य में उस समय राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया जब DMK और AIADMK के संभावित गठबंधन की खबरें सामने आईं। TVK ने साफ कहा है कि अगर दोनों द्रविड़ पार्टियां मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश करती हैं, तो पार्टी के सभी विधायक इस्तीफा दे देंगे। इस बयान को राजनीतिक दबाव की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। TVK लगातार खुद को “जनादेश की असली दावेदार” पार्टी बता रही है।
लोकभवन के बाहर TVK समर्थकों का प्रदर्शन
शुक्रवार सुबह TVK समर्थकों ने गवर्नर हाउस के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। समर्थकों ने नारेबाजी करते हुए जल्द सरकार गठन की मांग उठाई। स्थिति को देखते हुए पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में भी लिया। चेन्नई में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है और राजभवन के आसपास अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है।
कांग्रेस से दूरी के बाद DMK का बड़ा कदम
उधर, कांग्रेस के साथ गठबंधन टूटने के बाद DMK ने लोकसभा में अपने सांसदों की सीट बदलने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि अब कांग्रेस के साथ बैठना राजनीतिक रूप से उचित नहीं होगा। तमिलनाडु में तेजी से बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच अब सबकी नजर राज्यपाल के अगले फैसले और विजय की अगली रणनीति पर टिकी है।
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