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विक्रमोत्सव 2026: वाराणसी में 3 दिन तक गूंजेगी सम्राट विक्रमादित्य की गाथा, भव्य महानाट्य और एमपी संस्कृति का प्रदर्शन

02 अप्रैल, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
विक्रमोत्सव 2026: वाराणसी में 3 दिन तक गूंजेगी सम्राट विक्रमादित्य की गाथा, भव्य महानाट्य और एमपी संस्कृति का प्रदर्शन
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

धार्मिक नगरी वाराणसी में इस बार संस्कृति और इतिहास का अनोखा संगम देखने को मिलेगा। 3 से 5 अप्रैल तक यहां सम्राट विक्रमादित्य की गाथा को जीवंत करता भव्य महानाट्य आयोजित होगा।


भव्य शुभारंभ, बड़े नेताओं की मौजूदगी

इस खास आयोजन का शुभारंभ डॉ मोहन यादव, गजेंद्र सिंह शेखावत और योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में होगा। यह आयोजन सिर्फ एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारत की गौरवशाली विरासत को मंच पर उतारने की बड़ी पहल माना जा रहा है।


200 से ज्यादा कलाकार, भव्य प्रस्तुति

महानाट्य में 200+ कलाकार हिस्सा लेंगे, जिसमें हाथी, घोड़े, ऊंट, रथ और पालकियों के साथ भव्य दृश्य तैयार किए जाएंगे। इसके साथ ही लाइट शो, युद्ध दृश्य, आतिशबाजी और बाबा महाकाल की भस्म आरती की झलक दर्शकों को रोमांचित करेगी।


विक्रमादित्य की पूरी गाथा होगी जीवंत

इस मंचन में सम्राट विक्रमादित्य के जन्म से लेकर राजतिलक तक की कहानी दिखाई जाएगी। साथ ही विक्रम-बेताल की प्रसिद्ध कथाएं और सनातन धर्म के उत्थान की गाथा भी इसमें प्रमुख आकर्षण होंगी।


एमपी टूरिज्म पवेलियन बनेगा खास आकर्षण

कार्यक्रम में मध्य प्रदेश की कला, शिल्प और पर्यटन को दर्शाता एमपी टूरिज्म पवेलियन खास आकर्षण रहेगा। यहां प्रदेश की विविध संस्कृति, हस्तशिल्प और पर्यटन स्थलों को आकर्षक तरीके से प्रदर्शित किया जाएगा।


जनजातीय कला और कारीगरी की झलक

पवेलियन में बुंदेली, गोंड और भील पेंटिंग्स के साथ जनजातीय संस्कृति की झलक देखने को मिलेगी। इसके अलावा खजूर की पत्तियों से बनी कलाकृतियां और टेराकोटा शिल्प भी लोगों का ध्यान खींचेंगे।


स्वाद का भी मिलेगा पूरा मजा

कार्यक्रम में फूड कोर्ट भी खास होगा, जहां मध्य प्रदेश के पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद मिलेगा। यहां इंदौरी पोहा-जलेबी, मक्के का कीस, कचौरी, उड़द दाल-कोदो भात, मावा बाटी और लस्सी जैसे व्यंजन लोगों को आकर्षित करेंगे।

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