
नीट अभ्यर्थियों की आत्महत्याएं बेहद दुःखद हैं। पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना और न्याय की मांग पूरी तरह उचित है। एक मनोचिकित्सक के रूप में मेरा विनम्र सुझाव है कि मुआवजे की मांग रखते समय भाषा ऐसी हो, जिससे आत्महत्या का महिमामंडन न हो।
सार्वजनिक संदेश कभी-कभी गहरे मानसिक संकट से गुजर रहे कुछ संवेदनशील युवाओं को यह संकेत दे सकते हैं कि आत्महत्या के बाद परिवार को आर्थिक लाभ या विशेष सामाजिक ध्यान मिलेगा। ऐसी अनपेक्षित व्याख्या से बचना मानसिक स्वास्थ्य की दृष्टि से आवश्यक है। न्याय की मांग और आत्महत्या की रोकथाम दोनों साथ-साथ चलें, यही समाज और युवाओं के हित में होगा।
सुझाव: मुआवजे की मांग के साथ यह संदेश भी प्रमुखता से रखें…
. आत्महत्या किसी भी समस्या का समाधान नहीं है।
. मानसिक स्वास्थ्य सहायता सभी विद्यार्थियों तक पहुंचे।
. परीक्षा व्यवस्था अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष बने।
. भविष्य में ऐसी त्रासदियों की रोकथाम के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
( कॉकरोच जनता पार्टी के लिए भोपाल के वरिष्ठ मनोचिकित्सक की कलम से लिखा गया खुला पत्र … )
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