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क्या मोदी सरकार वापस लेगी कच्चाथिवु द्वीप? जानें श्रीलंका के मंत्री ने क्या दिया जवाब

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क्या मोदी सरकार वापस लेगी कच्चाथिवु द्वीप? जानें श्रीलंका के मंत्री ने क्या दिया जवाब

क्या मोदी सरकार वापस लेगी कच्चाथिवु द्वीप? जानें श्रीलंका के मंत्री ने क्या दिया जवाब

News World Desk
डेस्क रिपोर्टर
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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में कच्चाथिवु द्वीप के मुद्दे पर कांग्रेस और डीएमके पर अपनी चिंता व्यक्त की थी। केंद्र सरकार इस मामले को गंभीरता से ले रही है। सोमवार को विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी कांग्रेस पर अपनी प्रतिक्रिया दी। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या मोदी सरकार कच्चाथिवु को लेकर कोई महत्वपूर्ण निर्णय लेने जा रही है? क्या भारत कच्चाथिवु को वापस लेने की योजना बना रहा है? इस संबंध में श्रीलंका की ओर से एक बयान सामने आया है। श्रीलंका के एक मंत्री ने कहा है कि भारत की ओर से अभी तक इस मामले में कोई आधिकारिक आदेश प्राप्त नहीं हुआ है।

श्रीलंका के राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे के मंत्रिमंडल में तमिल मूल के मंत्री जीवन थोंडामन ने बताया कि जहां तक श्रीलंका का सवाल है, कच्चाथिवु का क्षेत्र श्रीलंका के नियंत्रण में आता है। वर्तमान में श्रीलंका और भारत के बीच संबंध काफी अच्छे हैं। भारत की ओर से अभी तक कच्चाथिवु द्वीप को वापस करने के संबंध में कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिली है। अगर भारत ऐसा कदम उठाता है, तो विदेश मंत्रालय उसका जवाब देगा। उन्होंने एक सवाल के जवाब में कच्चाथिवु को भारत को वापस करने की किसी भी संभावना से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सीमाओं को बदला नहीं जा सकता है।


बता दें कि प्रधानमंत्री मोदी ने रविवार को इस मुद्दे पर कांग्रेस और डीएमके की आलोचना की थी। इसके बाद, सोमवार को विदेश मंत्री एस जयशंकर ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस की आलोचना की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और डीएमके ने इस मामले को इस तरह से संभाला है जैसे कि इस पर उनकी कोई जिम्मेदारी नहीं है। जयशंकर ने 1974 में हुए समझौते का उल्लेख करते हुए कहा कि उस वर्ष भारत और श्रीलंका के बीच एक समझौता हुआ था। दोनों देशों ने उस पर हस्ताक्षर किए थे। उसके बाद, कांग्रेस की तत्कालीन सरकार ने एक समुद्री सीमा खींची और समुद्री सीमा खींचने में कच्चाथीवू को सीमा के रूप में शामिल किया।


कच्चाथीवू द्वीप 1974 तक भारत का हिस्सा था, लेकिन श्रीलंका भी इस द्वीप पर अपना दावा करता रहा। यह द्वीप, नेदुन्तीवु, श्रीलंका और रामेश्वरम (भारत) के बीच स्थित है। 1974 में भारत सरकार और श्रीलंका सरकार के बीच समझौते के बाद भारत सरकार ने कच्चाथीवू द्वीप का स्वामित्व श्रीलंका को सौंप दिया। इस समझौते से भारत और श्रीलंका के बीच अंतरराष्ट्रीय समुद्री सीमा निर्धारित हो गई। हालांकि इसके बाद भी विवाद कम नहीं हुआ। 1991 में तमिलनाडु विधानसभा ने प्रस्ताव पास किया और इस द्वीप को वापस लेने की मांग की गई।

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