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महिला आरक्षण बिल पर संसद में तीखी बहस, सीटें 850 करने का प्रस्ताव; मुस्लिम आरक्षण पर सरकार-विपक्ष आमने-सामने

16 अप्रैल, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
महिला आरक्षण बिल पर संसद में तीखी बहस, सीटें 850 करने का प्रस्ताव; मुस्लिम आरक्षण पर सरकार-विपक्ष आमने-सामने
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

नई दिल्ली। संसद में महिला आरक्षण से जुड़े बिल पेश होते ही माहौल गरमा गया। सरकार के प्रस्ताव पर विपक्ष ने तीखा विरोध शुरू कर दिया। मुद्दा सिर्फ आरक्षण का नहीं, बल्कि उसके दायरे और स्वरूप का बन गया है।


3 बिल पेश होते ही शुरू हुआ विरोध

महिला आरक्षण कानून में संशोधन से जुड़े 3 अहम बिल आज संसद में पेश किए गए। जैसे ही बिल पेश हुए, विपक्ष ने कड़ा विरोध दर्ज कराया। कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने सरकार पर संविधान से छेड़छाड़ का आरोप लगाया। इस बयान के बाद सदन का माहौल और ज्यादा तनावपूर्ण हो गया।


मुस्लिम आरक्षण पर बढ़ा विवाद

सपा सांसद Dharmendra Yadav ने मांग उठाई कि मुस्लिम महिलाओं को भी आरक्षण में शामिल किया जाए। इस पर केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने साफ कहा कि धर्म के आधार पर आरक्षण देना असंवैधानिक है और यह संभव नहीं है। यहीं से बहस और तेज हो गई और मुद्दा संवैधानिक दायरे बनाम सामाजिक प्रतिनिधित्व तक पहुंच गया।


अखिलेश यादव बनाम अमित शाह, तीखी नोकझोंक

सपा प्रमुख Akhilesh Yadav ने सवाल उठाया कि जब पूरा देश महिलाओं के लिए आरक्षण चाहता है, तो मुस्लिम महिलाओं को क्यों अलग रखा जा रहा है। जवाब में अमित शाह ने तंज कसते हुए कहा कि सपा चाहे तो अपने टिकट मुस्लिम महिलाओं को दे सकती है। इस बयान के बाद सदन में राजनीतिक गर्मी और बढ़ गई।


लोकसभा सीटें बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव

इस संशोधन बिल में लोकसभा सीटों को मौजूदा 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव रखा गया है। इनमें से 815 सीटें राज्यों और 35 सीटें केंद्र शासित प्रदेशों के लिए होंगी। साथ ही, सीटों की संख्या तय करने के लिए परिसीमन भी किया जाएगा। यह बदलाव देश की राजनीतिक संरचना पर बड़ा असर डाल सकता है।


महिलाओं के लिए 273 सीटें आरक्षित होंगी

प्रस्ताव के मुताबिक, कुल सीटों में से 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की जाएंगी। यह संख्या महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है। हालांकि, जिस तरह से इस पर विवाद हो रहा है, उससे साफ है कि इस बिल का रास्ता अभी आसान नहीं होगा।

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