
डेस्क रिपोर्टर
Sandeep Sinhaरिपोर्ट - विजय पचौरी
सुकमा। छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में नक्सल मुक्त बस्तर के संकल्प की दिशा में सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिली है। वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में चल रहे निरंतर नक्सल विरोधी अभियानों, अति संवेदनशील इलाकों में स्थापित सुरक्षा कैंपों और विकास कार्यों की बढ़ती पहुंच से माओवादी संगठन कमजोर पड़ता जा रहा है। इसी सकारात्मक माहौल में सुकमा पुलिस द्वारा संचालित ‘पूना मारगेम’ अभियान से प्रभावित होकर 7 महिला सहित कुल 26 सक्रिय माओवादी कैडरों ने हिंसा का रास्ता छोड़ समाज की मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया और पुलिस अधीक्षक सुकमा के समक्ष आत्मसमर्पण किया।
आत्मसमर्पित माओवादियों पर कुल 64 लाख रुपये का इनाम घोषित था। अंदरूनी और दुर्गम क्षेत्रों में लगातार सुरक्षा बलों की मौजूदगी, शासन की योजनाओं का सीधा लाभ और पुलिस के बढ़ते प्रभाव से माओवादी संगठन में असंतोष बढ़ा, जिसके परिणामस्वरूप यह सामूहिक आत्मसमर्पण सामने आया। छत्तीसगढ़ शासन की “छत्तीसगढ़ नक्सलवादी आत्मसमर्पण/पीड़ित राहत पुनर्वास नीति–2025” के तहत सभी आत्मसमर्पित कैडरों को प्रति व्यक्ति 50-50 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि, घोषित इनाम की राशि तथा आवास, आजीविका, कौशल विकास और अन्य पुनर्वास सुविधाएं प्रदान की जाएंगी, ताकि वे सम्मानजनक और सुरक्षित जीवन की नई शुरुआत कर सकें।
प्रशासन का मानना है कि ‘पूना मारगेम’ अभियान बस्तर में शांति, विश्वास और विकास का मजबूत सेतु बन रहा है। यह आत्मसमर्पण न केवल माओवादी संगठन के कमजोर पड़ने का संकेत है, बल्कि इस बात का भी प्रमाण है कि बस्तर अब हिंसा नहीं, बल्कि संवाद और विकास की राह पर आगे बढ़ रहा है।
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