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डेस्क रिपोर्टर
गरियाबंद, न्यूज़ वर्ल्ड डेस्क। गरियाबंद के एक छोटे से गांव से 59 लोग पलायन कर गए। लोगों के पलायन की हकीकत सामने आई तो जिला प्रशासन के हाथ पांव फूल गए। यही नहीं जिला प्रशासन की कार्यशैली की कलाई भी खुलकर सामने आ गई।
गांव में नहीं है रोजगार का साधन
महज 250 की आबादी वाले मैनपुर विकासखंड की इंदागांव पंचायत के आश्रित गांव अमली के 59 लोग पलायन कर गए। जिसमें 8 बच्चे भी शामिल है। ग्रामीण रोजी-रोटी की तलाश में दूसरे प्रदेश चले गए। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में रोजगार के साधन नहीं होने के कारण वे पलायन करने पर मजबूर है। ग्रामीण आज भी बांस बल्ली के बर्तन बनाकर अपना जीवन यापन करने पर मजबूर है। रोजगार तो दूर ग्रामीण मूलभूत समस्याओं से जूझ रहे है। ग्रामीणों ने पिछले 3 साल से लगातार पलायन का दावा किया है।
कमार जनजाति के है ये आदिवासी
पलायन करने वालो से लेकर गांव में रहने वाले सभी लोग आदिवासी कमार जनजाति के है। शासन द्वारा समाज के लिए अनेक योजनाएं संचालित है, मगर ग्रामीणों को आजतक उनमें से एक भी योजना का लाभ नही मिल पाया। ग्रामीण सड़क, बिजली, पानी और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित है। गांव में आजतक कोई 10वीं पास नही कर पाया। गांव में आई बहु बेलमती 12वीं पास है। नौकरी के लिए आवेदन दिए, नही मिली तो वह भी परिवार के साथ पलायन कर गयी। ग्रामीणों का दावा है कि वे अपनी समस्याओं को लेकर 10 साल से लड़ाई लड़ रहे है, मगर किसी ने उनकी सुध नही ली। परेशान ग्रामीण अब गांव के विस्थापन की बात करने लगे है।
अधिकारियों का गांव पहुंचने का सिलसिला जारी
गांव से बड़ी संख्या में पलायन की खबर सुनकर अधिकारियों के गांव पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया है। अधिकारी भी मानते है कि ग्रामीणों को परेशानियां है, मगर इसका समाधान कैसे होगा इसका उनके पास कोई ठोस जवाब नही है।
कमार जनजाति के लिए शासन की विशेष योजनाएं संचालित होने के बावजूद हितग्राहियो को उनका लाभ मिलता नजर नहीं आ रहा है। ऐसे में सरकार की ये योजनाएं कैसे संचालित हो रही है, इस पर सवाल उठना लाजमी है।
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