
भोपाल। सागर मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल (एसएमएच) के विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने दुर्लभ हृदय ट्यूमर 'मायक्सोमा' का सफल ऑपरेशन किया है। गंभीर रूप से बीमार 40 वर्षीय महिला के हृदय के चेम्बर से अंदर से 6x5 सेंटीमीटर के ट्यूमर को निकाल कर इलाज किया है। मरीज को हॉस्पिटल से छुट्टी दे दी गई है, उसने ऑपरेशन करने वाली डॉक्टरों की टीम का आभार व्यक्त किया है।
हॉस्पिटल की टीम का दावा है कि प्रदेश में पहली बार इस तरह का दुर्लभ हृदय ट्यूमर 'मायक्सोमा' का मरीज सामने आया। सागर मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल के विशेषज्ञ डॉक्टरों की संयुक्त टीम ने सफलतापूर्वक इसे निकाल लिया है। मरीज छह महीनों से दूसरे अस्पताल में शरीर के बाएं हिस्से के कमजोरी का इलाज करा रही थी। दवाइयों से उसे कोई आराम नहीं मिल रहा था।
महिला का एसएमएच के कंसलटेंट इंटरनल मेडिसिन सर्विसेज के डॉ. अंकित तिवारी ने गहन जांच और मूल्यांकन किया गया। उसे रक्तचाप में उलार-चढ़ाव, सांस लेने में तकलीफ, कभी-कभी सीने में दर्द, चक्कर आना और एकदम से धड़कन तेज होना, विशेष रूप से गतिविधि या स्थिति में बदलाव के साथ-साथ थकान के सामान्य लक्षण और रात में पसीना आने की शिकायत देख डॉ. अंकित तिवारी ने हॉस्पिटल में भर्ती किया।
मस्तिष्क तक रक्त का प्रवाह भी कम हो गया था
मरीज के हृदय में ट्यूमर की मौजूदगी की वजह से मस्तिष्क तक रक्त का प्रवाह भी कम हो गया। रक्त प्रवाह अवरुद्ध भी हो रहा था। इसके परिणामस्वरूप, उसे निम्न रक्तचाप हो गया था। उसे आईसीयू में भर्ती कराया गया था। डॉ. मुकद्दर अहमद सीनियर कंसलटेंट आईसीयू सेवाएं और टीम ने क्रिटिकल केयर की विशेषज्ञ डॉक्टरों की एक टीम ने मरीज की हालत स्थिर करने का प्रयास किया, लेकिन उनका रक्तचाप लगातार घट व बढ़ रहा था। एसएमएच के इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. महेश शर्मा ने महिला को मायक्सोमा नामक एक दुर्लभ हृदय ट्यूमर से पीड़ित डायग्नोज किया। पता चला कि हृदय के बाएं चेंबर में एक ट्यूमर बताया जो उपरोक्त सभी लक्षणों का कारण बन रहा है। ये लक्षण ट्यूमर द्वारा रक्त प्रवाह को अवरुद्ध करने और प्रणालीगत प्रभाव पैदा होने के कारण उत्पन्न होते हैं।
ट्यूमर टूटकर अलग होने पर स्ट्रोक के साथ जान का खतरा हो सकता था
डॉ. महेश शर्मा ने बताया कि अगर ट्यूमर टूटकर अलग हो जाता, तो स्ट्रोक के साथ-साथ जान का खतरा हो सकता था। एसएमएच के न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. मनीष शाक्या ने मरीज के मस्तिष्क में रक्त प्रवाह कम होने के कारण रक्तस्रावी मेटास्टेसिस भी डायगनोज किया। न्यूरो सर्जन डॉ. निशांत शुक्ला ने मरीज की बारीकी से निगरानी की और मरीज के रिश्तेदारों को रोग के संभावित परिणाम के बारे में समझाया और उन्हें निरंतर काउंसिल किया। जटिलताओं के कारण महिला में गंभीर गुर्दे की चोट विकसित हो गई थी और एसएमएच के नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. अजय झा और गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. रघुवीर चंद्र ने दवाओं के माध्यम से जटिलताओं का प्रबंधन किया।
परिवार की सहमति लेने के बाद ऑपरेशन का निर्णय लिया
क्रिटिकल केयर और एनेस्थेसियोलॉजिस्ट डॉ. महेश एस. कुर्वे और कार्डियक एनेस्थेसियोलॉजिस्ट डॉ. ब्रजेश कौशल के मार्गदर्शन में मरीज को एक सप्ताह तक चिकित्सकीय रूप से स्थिर रखा गया। एसएमएच के विशेषज्ञ डॉक्टरों की संयुक्त टीम ने मरीज के बीमारी के समाधान पर विस्तार से चर्चा की और परिवार से उच्च जोखिम सहमति प्राप्त करने के बाद ऑपरेशन करने का फैसला किया। महिला का ऑपरेशन हॉस्पिटल में कार्डियोथोरेसिक और वैस्कुलर सर्जरी सर्विसेज के कंसलटेंट डॉ. संजीव गुप्ता ने किया।
5 घंटे से अधिक समय तक चला ऑपरेशन
ऑपरेशन 5 घंटे से अधिक समय तक चला। ऑपरेशन के दौरान हॉस्पिटल के न्यूरोलॉजी, नेफ्रोलॉजी, गैस्ट्रोलॉजी, क्रिटिकल केयर और एनेस्थेसियोलॉजिस्ट की संयुक्त टीम ने डॉक्टर्स की टीम ने समन्वय स्थापित करते हुए मरीज की स्थिति को स्थिर बनाए रखा। विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम का उद्देश्य हृदय के ट्यूमर को बिना तोड़े सुरक्षित रूप से निकालना और कई अंगों के प्रभावित होने के कारण अन्य जटिललाओं से बचना रहा। संयुक्त प्रयास से टीम ने महिला के हृदय से 6x5 सेंटीमीटर का ट्यूमर सफलतापूर्वक निकाला और इस जटिल सर्जरी को सफल बनाया। ऑपरेशन के बाद मरीज को रिकवरी के लिए सीसीसीयू के कार्डियक केयर विभाग की केयर में रखा। ऑपरेशन के बाद महिला के लक्षणों में सुधार हुआ और उन्होंने पांचवें दिन उसने धीरे-धीरे चलना शुरू कर दिया। उन्हें अगले सप्ताह फॉलो अप के लिए बुला महिला को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
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