
डेस्क रिपोर्टर
Sandeep Sinha
रिपोर्ट - विजय पचौरी
बस्तर। छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल में चल रहे नक्सल विरोधी अभियान के तहत सुरक्षा बलों को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। 115 से अधिक जवानों की हत्या में शामिल रहा 25 लाख रुपये का इनामी कुख्यात नक्सली अपनी पत्नी के साथ सुकमा पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचकर आत्मसमर्पण कर दिया। बस्तर आईजी सुंदरराज पी. के नेतृत्व में चलाए जा रहे इस अभियान के चलते लगातार नक्सलियों पर दबाव बढ़ता जा रहा है। सुरक्षा बलों की सख्त कार्रवाई और राज्य सरकार की पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर अब नक्सली मुख्यधारा में लौटने लगे हैं। आत्मसमर्पण करने वाला यह दंपति पिछले करीब 40 वर्षों से नक्सली संगठन में सक्रिय था और कई बड़ी घटनाओं में उसकी भूमिका रही है।
जानकारी के अनुसार, समर्पण करने वाला नक्सली साल 2013 के बहुचर्चित झीराम घाटी कांड में भी शामिल रहा है, जिसमें कई कांग्रेसी नेताओं की हत्या की गई थी। लगातार हो रही मुठभेड़ों और सर्च ऑपरेशन से भयभीत होकर उसने संगठन छोड़ने का फैसला किया और अंततः पत्नी सहित सरेंडर कर दिया। छत्तीसगढ़ सरकार की पुनर्वास नीति के तहत दोनों नक्सलियों को 50-50 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई है। साथ ही उन्हें मुख्यधारा में जोड़ने और नया जीवन शुरू करने के लिए आवश्यक सहयोग भी दिया जाएगा।
सुकमा पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों को उम्मीद है कि आत्मसमर्पण करने वाले इस दंपति से नक्सली नेटवर्क, उनकी गतिविधियों और संगठन के बड़े चेहरों को लेकर कई अहम जानकारियाँ मिल सकती हैं, जिससे नक्सल उन्मूलन अभियान को और मजबूती मिलेगी। बस्तर क्षेत्र में लगातार हो रहे आत्मसमर्पण इस बात का प्रमाण हैं कि अब नक्सली संगठन की पकड़ कमजोर हो रही है और सरकार के प्रयास रंग ला रहे हैं।
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