
रायपुर। उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा की अध्यक्षता में शुक्रवार को मंत्रालय में विभाग की समीक्षा बैठक हुई। मंत्री ने न्यायालयीन मामलों में समयबद्ध कार्रवाई न होने पर नाराजगी व्यक्त की। कहा कि देरी की वजह से विभाग की छवि प्रभावित हो रही है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि ऐसे मामलों में तत्काल कार्यवाही सुनिश्चित की जाए। विभागीय कार्यों में देरी किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं होगी।
बैठक में मंत्री टंकराम वर्मा ने विश्वविद्यालयों और संभाग के एक-एक महाविद्यालयों में स्टूडियो निर्माण, सभी महाविद्यालयों में ई-क्लासरूम विकसित करने और विद्यार्थियों के लिए डिजिटल संसाधनों को सुदृढ़ बनाने पर भी विचार-विमर्श किया। प्राचार्यों को निर्देशित किया गया कि वे सभी प्राध्यापकों से व्याख्यान बनवाकर विद्यार्थियों को उपलब्ध कराएं, जिससे गुणवत्तापूर्ण शिक्षण सुनिश्चित हो सके। बैठक में उच्च शिक्षा सचिव डॉ. एस. भारतीदासन, आयुक्त उच्च शिक्षा संतोष देवागंन सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
भारतीय ज्ञान परंपरा को पाठ्यक्रम में शामिल करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ने पर दिया जोर
उच्च शिक्षा मंत्री ने भारतीय ज्ञान परंपरा को उच्च शिक्षा के पाठ्यक्रम में शामिल करने की प्रक्रिया को भी आगे बढ़ाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि राज्य में गुणवत्ता युक्त शिक्षा प्रदान करना हमारी सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। इसके लिए जो भी सुधार की आवश्यकता होगी विभाग सक्षम है। इसे लेकर विभाग को और अधिक सक्रियता व जवाबदेही के साथ कार्य करना होगा।
प्राध्यापकों की वरिष्ठता सूची एक सप्ताह के भीतर जारी करने का आदेश
मंत्री ने प्राध्यापकों की वरिष्ठता सूची एक सप्ताह के भीतर जारी करने का ओदश दिया। यह भी कहा कि वर्ष 2024 की रिव्यू डीपीसी कर प्राध्यापकों को प्राचार्य पद पर पदोन्नति 24 दिसंबर 2025 तक प्रक्रिया पूर्ण करने का निर्णय लिया गया। विश्वविद्यालयों में ज्ञानअर्जन पोर्टल लागू करने हेतु निर्देश जारी किए जाए तथा एक टास्क फोर्स गठित की जाए। प्रदेश के सभी महाविद्यालयों से प्राध्यापक, सहायक प्राध्यापक, ग्रंथपाल एवं क्रीड़ाअधिकारियों की समस्त जानकारी जनवरी 2026 तक ऑनलाइन कर दी जाए।
समय पर उपस्थित न होने वालो पर कार्यवाही सुनिश्चित की जाए
बैठक में महाविद्यालयों में प्राचार्यों और प्राध्यापकों तथा समस्त कर्मचारियों की उपस्थिति अनिवार्य करने के लिए बायोमैट्रिक्स मशीन लगाई जाए तथा समय पर उपस्थित न होने वालो पर कार्रवाई सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। बैठक में मंत्री ने यह भी निर्देश दिए-
प्रदेश के सभी विश्वविद्यालय व महाविद्यालय के प्राचार्य अकादमिक कैलेंडर का पालन सुनिश्चित करें। समय-सारणी के अनुसार कक्षाओं का संचालन हो।
प्राचार्य सुबह 10:30 बजे से शाम 5:30 बजे तक महाविद्यालय में खुद अनिवार्य रूप से उपस्थित रहें और कक्षाओं के निरीक्षण की जिम्मेदारी गंभीरता से निभाएं।
एनईपी-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन, एनईपी कार्यक्रम के प्रचार-प्रसार के कार्य को निरंतर जारी रखने तथा अतिथि व्याख्याताओं को एनईपी प्रशिक्षण देने पर जोर दिया।
शैक्षणिक गतिविधियों में किसी भी प्रकार की लापरवाही पर कठोर कार्रवाई की जाए।
परीवीक्षा अवधि पूर्ण कर चुके सहायक प्राध्यापकों के परीवीक्षा समाप्ति आदेश 15 कार्य दिवस के भीतर जारी करने के निर्देश भी दिए गए।
यह भी तय किया गया कि न मांग, न जांच सेवा नियुक्ति संबंधी आदेश 7 दिनों में जारी किए जाएं।
पीएचडी अनुमति के लिए लंबित प्रकरणों की जांच 15 दिनों में पूर्ण कर स्वीकृति पत्र प्रदान किए जाएं। वरिष्ठ श्रेणी वेतनमान और प्रवर श्रेणी वेतनमान जनवरी के प्रथम सप्ताह तक जारी करने के निर्देश दिए।
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