
रायपुर। बीजापुर जेल परिसर में एक विशेष मुलाकात कार्यक्रम आयोजित किया गया। नक्सलवाद का रास्ता छोड़ मुख्यधारा में लौटे नक्सली जेल में अपने परिजनों से मिले। प्रदेश सरकार की ओर से शुरू की गई इस पहल से एक अलग ही नजारा दिखा। पुर्नवासित नक्सली आंखों में आंसू लेकर अपने परिजनों के मिलने का इंतजार कर रहे थे। सभी के चेहरे पर अपने परिजनों से सालों बाद मिलने की खुशी भी दिखाई दे रही थी।
इस कार्यक्रम ने वर्षों से नक्सलवादी विचारधारा की वजह से भटके और बिखरे परिवारों को एक बार फिर जोड़ने का मार्ग प्रशस्त किया। यह मुलाक़ात केवल चेहरे मिलने की नहीं थी, यह टूटे विश्वासों को जोड़ने, दिलों पर जमा बोझ को हल्का करने और मुख्यधारा की ओर बढ़ने के नए संकल्पों की मुलाक़ात थी। पुनर्वासित माओवादी कैडर्स के संतू वेक्को, मारो वेक्को, रामलाल वेक्को, संतोष कुंजाम, बदरू ओयाम, मासा तामो, लखन ओयाम, लक्ष्मण ताती, मैनु आरकी, राजेश वेट्टी एवं कुमारी आरकी ने अपने उन परिजनों से मुलाक़ात की, जो वर्तमान में नक्सल प्रकरण में बीजापुर जेल में निरुद्ध हैं। जेल में निरुद्ध अर्जुन वेक्को, मनी ओयाम, भीमसेन ओयाम, भीमा मुचाकी, सायको माड़वी, सोमारू मड़कम, बुधरू आरकी और शंकर कोरसा ने अपने परिजनों से मिलकर अपने आंसू नहीं रोक सके।
उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में माओवादी विचारधारा में भटके युवाओं को मुख्यधारा में लाकर शासन की ओर से संवेदनशील पहल के तहत नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति, विश्वास और विकास सुनिश्चित किया जा रहा है। हमारे भटके हुए आदिवासी समाज के जेल में निरूद्ध युवाओं को पुनर्वास का विकल्प भी दिया जा रहा है। जो कभी बहकावे से हिंसा का राह थाम लिए थे अब मुख्यधारा में लौटने के लिए उनके लिए राहें भी खोली जा रहीं हैं। सभी को पुनर्वास करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
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