
डेस्क रिपोर्टर
Sandeep Sinhaरिपोर्ट - मनोज श्रीवस्तव
मनेंद्रगढ़। नववर्ष के उल्लासपूर्ण स्वागत और बीतते वर्ष की भावपूर्ण विदाई के अवसर पर शहर एक अद्भुत, भव्य और सांस्कृतिक चेतना से ओत-प्रोत महोत्सव का साक्षी बना। यहां आयोजित बहुरूपिया प्रतियोगिता ने न केवल मनोरंजन किया, बल्कि लोक कला, परंपरा और सामाजिक एकता का जीवंत उत्सव भी प्रस्तुत किया। यह आयोजन केवल एक प्रतियोगिता नहीं, बल्कि हमारी समृद्ध लोक कला, पारंपरिक वेशभूषा और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित व संवर्धित करने का सशक्त प्रयास रहा। आधुनिक और तकनीकी युग में, जब पारंपरिक कलाएं धीरे-धीरे विलुप्त हो रही हैं, तब यह मंच उन कलाकारों के लिए आशा की किरण बनकर उभरा, जो अपनी कला के माध्यम से समाज से जुड़ना चाहते हैं।
बहुरूपिया प्रतियोगिता में कलाकारों ने ऐतिहासिक, सामाजिक, पौराणिक और लोक पात्रों का सजीव रूप धारण कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। वेशभूषा, भाव-भंगिमा, संवाद अदायगी और अभिनय कौशल के माध्यम से कलाकारों ने लोक संस्कृति और आधुनिक समाज के बीच सेतु का कार्य किया। इस आयोजन की सबसे अनोखी विशेषता यह रही कि प्रतियोगिता मंच तक सीमित न रहकर शहर के मुख्य मार्गों, चौक-चौराहों और गलियों में सजीव रूप से प्रस्तुत की गई, जिससे आमजन सीधे कलाकारों से जुड़ सके।
कार्यक्रम को सफल बनाने में शहर के व्यापारियों का योगदान अत्यंत सराहनीय रहा। व्यापारियों के सहयोग से प्रतिभागियों को गृहस्थी से जुड़ा संपूर्ण सामान प्रदान किया गया, जिसे एकत्र कर आकर्षक गिफ्ट हैम्पर के रूप में लाखों रुपये के पुरस्कार तैयार किए गए। यह सहभागिता इस बात का उदाहरण बनी कि जब समाज एकजुट होता है, तो कला और संस्कृति को नया जीवन मिलता है।
प्रतियोगिता के दौरान 10 सदस्यीय निर्णायक मंडल ने वेशभूषा, सृजनात्मकता, अभिनय कौशल और प्रस्तुति की मौलिकता के आधार पर निष्पक्ष मूल्यांकन किया। एकल वर्ग में नरसिंह अवतार का प्रभावशाली किरदार निभाने वाले कलाकार को प्रथम पुरस्कार के रूप में प्लेटिना बाइक सहित अन्य उपहार प्रदान किए गए, वहीं समूह वर्ग में ‘कबीला’ की प्रस्तुति को प्रथम स्थान मिला, जिन्हें पल्सर बाइक से सम्मानित किया गया। इसके अलावा अन्य प्रतिभागियों को भी विशिष्ट अतिथियों के करकमलों से अनेक उपयोगी और बड़े उपहार दिए गए।
कार्यक्रम को देखने रायपुर से पहुंचे निजी चैनल के एंकर पुनीत पाठक ने आयोजन की खुले दिल से प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि उन्होंने बहुरूपिया कला को कई बार टेलीविजन पर देखा है, लेकिन मनेंद्रगढ़ का यह आयोजन अद्वितीय है। “मैं पिछले छह घंटों से इस कार्निवल के साथ हूं। दुनिया में कई बड़े आयोजन होते हैं, लेकिन यहां पूरा शहर इसमें सहभागी है। प्रतिभागी भी यहीं के हैं और सबसे खास बात यह है कि बिना नकद चंदे के, शहर अपनी सामर्थ्य के अनुसार सामान देकर लाखों के पुरस्कार तैयार करता है। बहुरूपिया कला के माध्यम से मानव सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक मुद्दों और वैश्विक विषयों तक को सड़क पर जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया—यह सचमुच अद्भुत है,” उन्होंने कहा।
मनेंद्रगढ़ में यह बहुरूपिया प्रतियोगिता नववर्ष के स्वागत का एक अनूठा और प्रेरणादायक उदाहरण बनकर सामने आई है। यह आयोजन यह संदेश देता है कि हमारी कला ही हमारी पहचान है और इसे सहेजना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। मनेंद्रगढ़ ने यह साबित कर दिया कि जब पूरा शहर परिवार की तरह एकजुट होकर उत्सव मनाता है, तो उससे बेहतर नववर्ष स्वागत का तरीका शायद ही कोई हो।
पाठकों की राय (0)
इस खबर पर अभी कोई कमेंट नहीं है। पहले आप लिखें!

