
रायपुर। राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने बुधवार को अपने निवास कार्यालय में डिजिटल किसान किताब का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि डिजिटल ऋण पुस्तिका केवल एक तकनीकी नवाचार नहीं, बल्कि राजस्व व्यवस्था को पारदर्शी, सशक्त और नागरिक केंद्रित बनाने की दिशा में ठोस कदम है।
मंत्री टंकराम वर्मा ने कहा कि छत्तीसगढ़ एक कृषि प्रधान राज्य है, जहां बड़ी संख्या में किसान अपनी आजीविका के लिए भूमि पर निर्भर हैं। अब ऋण पुस्तिका से संबंधित जानकारी ऑनलाइन और वास्तविक समय में उपलब्ध होने से किसानों को बैंक ऋण, फसल ऋण और शासकीय योजनाओं का लाभ लेने में सहूलियत होगी। डिजिटल प्रणाली से त्रुटियों में कमी आएगी, अभिलेखों की शुद्धता सुनिश्चित होगी और प्रशासनिक प्रक्रिया अधिक सरल एवं प्रभावी बनेगी।
मंत्री ने बताया कि यह पहल ‘डिजिटल छत्तीसगढ़’ की अवधारणा को मजबूती प्रदान करेगी और शासन और नागरिकों के बीच विश्वास को और सुदृढ़ बनाएगी। उन्होंने राजस्व विभाग, एनआईसी परियोजना से जुड़े सभी अधिकारियों और तकनीकी टीम को बधाई देते हुए नागरिकों से अपील की कि वे इस डिजिटल सुविधा का अधिकतम उपयोग करें।
छत्तीसगढ़ भू-अभिलेख नियमावली भाग 1 से 4 पुस्तक का किया गया विमोचन
मंत्री ने उमेश कुमार पटेल और श्रीकांत वर्मा की ओर से लिखित छत्तीसगढ़ भू-अभिलेख नियमावली भाग 1 से 4 पुस्तक का विमोचन भी किया। यह पहल राज्य के किसानों और भूमिधारकों को आधुनिक, सरल और त्वरित सेवाएं उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेगा। इस अवसर पर संचालक भू अभिलेख विनीत नन्दनवार सहित संबंधित अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।
किसानों को अपनी भूमि संबंधी जानकारी कभी भी और कहीं से भी मिलेगी
डिजिटल किसान किताब अब पारंपरिक मैन्युअल किसान किताब का स्थान लेगी। इसके माध्यम से किसानों को अपनी भूमि संबंधी जानकारी कभी भी और कहीं से भी ऑनलाइन प्राप्त करने की सुविधा मिलेगी। यह सुविधा भुइया पोर्टल पर B-1 और P-II रिपोर्ट के साथ उपलब्ध रहेगी, जिसे किसान आसानी से देख और डाउनलोड कर सकेंगे। डिजिटल प्रणाली में आवश्यक विवरण खुद अपडेट होते रहेंगे, जिससे जानकारी संशोधन के लिए कार्यालयों के चक्कर लगाने की आवश्यकता समाप्त होगी।
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