
डेस्क रिपोर्टर
Sandeep Sinhaरिपोर्ट - मनमोहन नेताम
गरियाबंद । आदिवासी बहुल क्षेत्र विकासखण्ड मैनपुर के अंतर्गत आने वाली शासकीय प्राथमिक शाला ओंकारपारा में शिक्षा विभाग की लापरवाही खुलकर सामने आई है। स्कूल में पाँच छात्र-छात्राओं की दर्ज संख्या है, जिनके लिए दो शिक्षकों की पदस्थापना की गई है। बावजूद इसके, बच्चों को सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। इसका मुख्य कारण बताया जा रहा है कि शाला का ई-डाइस कोड (U-DISE Code) बंद है।
मध्यान्ह भोजन, गणवेश और किताबों से वंचित मासूम
ई-डाइस कोड बंद होने के कारण स्कूल को शिक्षा विभाग की किसी भी योजना से जोड़ने में दिक्कत आ रही है। नतीजा यह है कि यहां पढ़ने वाले पाँचों बच्चे मध्यान्ह भोजन, स्कूली गणवेश और पाठ्यपुस्तकों से वंचित हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यह बच्चों के मौलिक अधिकारों का हनन है, और इससे उनका भविष्य अंधकार में जा रहा है।
कई बार आवेदन, फिर भी नहीं हुई कार्रवाई
शाला प्रबंधन की ओर से शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों को कई बार लिखित आवेदन दिया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि विभागीय उदासीनता के कारण मासूम बच्चे सरकारी सुविधाओं से वंचित हो रहे हैं। वहीं, ग्राम पंचायत गुरजीभाँटा (T) से ओंकारपारा की दूरी लगभग 4 किलोमीटर है और यह क्षेत्र घने जंगलों से घिरा हुआ है, जिसके चलते स्कूल को किसी अन्य शाला में मर्ज भी नहीं किया जा सकता।
संकुल समन्वयक ने जताई चिंता
इस पूरे मामले पर संकुल समन्वयक पदु सिंह नागेश ने बताया कि उन्होंने ओंकारपारा की समस्याओं से उच्च अधिकारियों को अवगत करा दिया है। अब देखना यह होगा कि कब तक इन आदिवासी बच्चों को मध्यान्ह भोजन, गणवेश, किताबें और छात्रवृत्ति जैसी मूलभूत सुविधाएं मिल पाती हैं।
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