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छत्तीसगढ़ के 6 विश्वविद्यालयों में संचालित होगा रक्षक पाठ्यक्रम, सीएम विष्णु देव साय ने कहा- छात्रों के सुरक्षित भविष्य गढ़ने में होगा सहायक
10 दिस, 2025 0 व्यूज 4 मिनट पढ़ाई
Cm vishnu dev sai

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Hitesh Kumar Singh
डेस्क रिपोर्टर
Hitesh Kumar Singh

रिपोर्ट: प्रशांत द्विवेदी

रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की उपस्थिति में उनके निवास कार्यालय में छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग और प्रदेश के 6 विश्वविद्यालयों के बीच “रक्षक पाठ्यक्रम” संचालित करने के लिए एमओयू हुआ। बाल अधिकार व संरक्षण पर आधारित यह अनूठा पाठ्यक्रम है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह छात्रों के सुरक्षित भविष्य करने में सहायक होगा।

 

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने यह भी कहा कि रक्षक पाठ्यक्रम छात्रों के जिम्मेदार भविष्य के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यह पाठ्यक्रम युवाओं को न केवल रोजगार के अवसर प्रदान करेगा, बल्कि बाल अधिकार संरक्षण के क्षेत्र में आवश्यक विशेषज्ञता भी विकसित करेगा। उन्होंने कहा कि कई बार बच्चे भूलवश या भ्रमित होकर गलत दिशा में चले जाते हैं। ऐसे बच्चों को सही मार्ग पर लाना हम सभी का सामूहिक दायित्व है।

 

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने रक्षक पाठ्यक्रम को रिकॉर्ड समय में तैयार करने और विश्वविद्यालयों में इसे लागू करने के लिए आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा और उनकी पूरी टीम को बधाई दी।

 

बाल अधिकार संरक्षण के क्षेत्र में व्यापक प्रयासों की आवश्यकता: लक्ष्मी रजवाड़े

महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी रजवाड़े ने कहा कि बाल अधिकार संरक्षण के क्षेत्र में व्यापक प्रयासों की आवश्यकता है। बच्चों से भिक्षावृत्ति कराना, परित्यक्त बच्चों का पुनर्वास, और संवेदनशील मामलों का समाधान, ये सभी अत्यंत चुनौतीपूर्ण विषय हैं। उन्होंने कहा कि यह पाठ्यक्रम संवेदनशील, सजग और सेवा-भावयुक्त युवा तैयार करने में मील का पत्थर साबित होगा। भविष्य में छत्तीसगढ़ इस क्षेत्र में अग्रणी राज्य के रूप में पहचाना जाएगा।

 

यह छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का विषय: टंकराम वर्मा

उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा ने पाठ्यक्रम को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने आयोग और सभी छह विश्वविद्यालयों को पाठ्यक्रम लागू करने हेतु बधाई दी। प्रदेश के किसी भी विश्वविद्यालय में अब तक ऐसा पाठ्यक्रम उपलब्ध नहीं था, जो युवाओं को बाल अधिकार संरक्षण के क्षेत्र में प्रशिक्षित करते हुए रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए।

 

इन विश्वविद्यालय में संचालित होगा पाठ्यक्रम 

यह एक वर्षीय स्नातकोत्तर “पीजी डिप्लोमा इन चाइल्ड राइट्स एंड प्रोटेक्शन” पाठ्यक्रम है। पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर, संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय, सरगुजा, कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, रायपुर, आंजनेय विश्वविद्यालय, रायपुर, एमिटी विश्वविद्यालय, रायपुर और श्री शंकराचार्य प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी, भिलाई-दुर्ग में शुरू होगा।

 

संपूर्ण सुविधा विश्वविद्यालयों को निशुल्क दी जाएगी

रक्षक – बाल अधिकार संरक्षण पर एक वर्षीय स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम” को विकसित किया गया है। इस पाठ्यक्रम से युवाओं को सैद्धांतिक एवं विधिक ज्ञान, विभागीय योजनाओं, संस्थाओं और प्रायोगिक प्रक्रियाओं की गहरी समझ, बाल संरक्षण इकाइयों आदि के सम्बन्ध में जानकारी उपलब्ध होगी। संवेदनशीलता, जागरूकता और बाल-अधिकारों की आत्मिक समझ विकसित करने वाला यह पाठ्यक्रम युवाओं को इस क्षेत्र में कुशल, समर्पित और प्रभावी मानव संसाधन के रूप में तैयार करेगा। आयोग द्वारा पाठ्यक्रम के संचालन, प्रशिक्षण, परामर्श और मार्गदर्शन की संपूर्ण सुविधा विश्वविद्यालयों को निशुल्क उपलब्ध कराई जाएगी।

 

एमओयू के दौरान उनकी रही उपस्थिति

कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा, ,पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर से कुलसचिव प्रो. शैलेंद्र पटेल, प्रो एके श्रीवास्तव,संत गहिरा गुरु विश्विद्यालय सरगुजा कुलपति प्रो. राजेंद्र लाकपाले, कुलसचिव शारदा प्रसाद त्रिपाठी, कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय रायपुर के कुलपति एवं रायपुर संभाग आयुक्त महादेव कावरे, कुलसचिव सुनील कुमार शर्मा, आंजनेय विश्वविद्यालय रायपुर कुलपति डॉ. टी.रामाराव कुलसचिव डॉ. रूपाली चौधरी, एमिटी विश्वविद्यालय रायपुर कुलपति डॉ. पीयूष कांत पाण्डेय, कुलसचिव डॉ. सुरेश ध्यानी, श्री शंकराचार्य प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी भिलाई दुर्ग चांसलर डॉ. आईपी मिश्रा, कुलपति डॉ. एके झा और डॉ जया मिश्रा, आयोग के सचिव प्रतीक खरे की उपस्थिति रही।

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