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LPG सिलेंडर 60 रुपये महंगा: घरेलू गैस अब ₹913, मिडिल ईस्ट तनाव के बीच सरकार ने बढ़ाया उत्पादन
07 मार्च, 2026 0 व्यूज 4 मिनट पढ़ाई
LPG सिलेंडर 60 रुपये महंगा: घरेलू गैस अब ₹913, मिडिल ईस्ट तनाव के बीच सरकार ने बढ़ाया उत्पादन
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

रसोई गैस इस्तेमाल करने वाले करोड़ों उपभोक्ताओं को झटका लगा है। केंद्र सरकार ने घरेलू LPG सिलेंडर की कीमत में 60 रुपये की बढ़ोतरी कर दी है। नई दरों के मुताबिक दिल्ली में 14.2 किलोग्राम वाला गैस सिलेंडर अब 913 रुपये में मिलेगा, जो पहले 853 रुपये था।

नई कीमतें 7 मार्च से लागू कर दी गई हैं। सरकार का कहना है कि वैश्विक हालात और सप्लाई के खतरे को देखते हुए यह फैसला लिया गया है।


कॉमर्शियल सिलेंडर भी हुआ महंगा

घरेलू गैस के साथ-साथ व्यवसायिक उपयोग में आने वाले सिलेंडर के दाम भी बढ़ाए गए हैं।

  • 19 किलो का कॉमर्शियल सिलेंडर: 115 रुपये महंगा

  • नई कीमत: 1883 रुपये

इससे पहले भी 1 मार्च 2026 को कॉमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में करीब 31 रुपये की बढ़ोतरी की गई थी।


करीब एक साल बाद बढ़े घरेलू सिलेंडर के दाम

घरेलू LPG सिलेंडर की कीमतों में यह वृद्धि लगभग एक साल बाद की गई है।

पिछली बार सरकार ने 8 अप्रैल 2025 को गैस सिलेंडर के दामों में 50 रुपये की बढ़ोतरी की थी।

यानी अब लगातार बढ़ते वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच फिर से कीमतों में बदलाव किया गया है।


गैस की कमी का खतरा, सरकार ने लिया बड़ा फैसला

मिडिल ईस्ट में बढ़ते सैन्य तनाव के कारण भारत में गैस की सप्लाई प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। इसी स्थिति को देखते हुए सरकार ने 5 मार्च को इमरजेंसी पावर का इस्तेमाल करते हुए देश की सभी ऑयल रिफाइनरी कंपनियों को LPG उत्पादन बढ़ाने का आदेश दिया।

सरकार के निर्देश के अनुसार:

  • रिफाइनरियां प्रोपेन और ब्यूटेन का उपयोग मुख्य रूप से LPG बनाने के लिए करेंगी

  • इन गैसों की सप्लाई सरकारी तेल कंपनियों को दी जाएगी

इसका उद्देश्य उपभोक्ताओं तक बिना रुकावट गैस सिलेंडर पहुंचाना है।


इन सरकारी कंपनियों को मिलेगी सप्लाई

रिफाइनरियों से मिलने वाली अतिरिक्त गैस मुख्य रूप से सरकारी तेल कंपनियों को दी जाएगी, जिनमें शामिल हैं:

  • इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC)

  • हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL)

  • भारत पेट्रोलियम (BPCL)

इन कंपनियों के जरिए देशभर में LPG की सप्लाई की जाती है।


क्यों बढ़ रहा है गैस सप्लाई का संकट?

विशेषज्ञों के अनुसार मौजूदा संकट की दो बड़ी वजहें सामने आई हैं।

1. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर खतरा

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता है।

  • लंबाई: लगभग 167 किलोमीटर

  • दुनिया के करीब 20% पेट्रोलियम का परिवहन इसी रास्ते से होता है

ईरान से जुड़े युद्ध हालात के कारण यह रूट फिलहाल असुरक्षित माना जा रहा है और कई तेल टैंकर यहां से गुजरने से बच रहे हैं।

भारत के लिए यह मार्ग बेहद अहम है क्योंकि देश:

  • करीब 50% कच्चा तेल

  • और 54% LNG

इसी रास्ते से आयात करता है।


2. कतर के LNG प्लांट का प्रोडक्शन रुका

हाल ही में अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच बढ़े तनाव के बाद खाड़ी देशों में कई सैन्य ठिकानों और ऊर्जा सुविधाओं पर हमले हुए हैं।

ईरान के ड्रोन हमले के बाद कतर के रास लफान LNG प्लांट को सुरक्षा कारणों से अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा।

यह भारत के लिए बड़ी चिंता की बात है क्योंकि:

  • भारत अपनी करीब 40% LNG जरूरत कतर से पूरी करता है

  • सालाना लगभग 2.7 करोड़ टन LNG भारत कतर से आयात करता है


CNG कंपनियों ने भी जताई चिंता

देश की सिटी गैस कंपनियों ने भी संभावित संकट को लेकर सरकार को चेतावनी दी है।

‘एसोसिएशन ऑफ सीजीडी एंटिटीज’ (ACE) ने सरकारी कंपनी GAIL को पत्र लिखकर गैस सप्लाई को लेकर स्पष्टता मांगी है।

कंपनियों का कहना है कि अगर कतर से सस्ती गैस नहीं मिली तो उन्हें स्पॉट मार्केट से गैस खरीदनी पड़ेगी, जहां कीमतें काफी ज्यादा हैं।

  • स्पॉट मार्केट कीमत: लगभग 25 डॉलर प्रति यूनिट

यह कॉन्ट्रैक्ट वाली गैस से दोगुनी से भी ज्यादा है।


प्राइवेट कंपनियों पर भी पड़ेगा असर

सरकार के आदेश का असर निजी क्षेत्र की ऊर्जा कंपनियों पर भी पड़ सकता है।

प्रोपेन और ब्यूटेन को LPG बनाने में लगाने से पेट्रोकेमिकल उत्पादों का उत्पादन घट सकता है, जिनका इस्तेमाल पेट्रोल की गुणवत्ता सुधारने और अन्य उद्योगों में किया जाता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इससे कंपनियों के मुनाफे पर भी असर पड़ सकता है।

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