
नई दिल्ली। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में शुरू हुए ‘ज्ञान भारतम् मिशन’ के पहले अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन को “भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा को वैश्विक मंच पर लाने वाला ऐतिहासिक कदम” बताया।
अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर लिखा, “पांडुलिपियों, भोजपत्रों, ताम्रपत्रों, शिलालेखों और अभिलेखों में संरक्षित भारत के ज्ञान, विज्ञान और अनुसंधान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का यह अनूठा प्रयास है। प्रधानमंत्री मोदी के दूरदर्शी विजन से शुरू हुआ ‘ज्ञान भारतम् मिशन’ भारत की अकल्पनीय ज्ञान विरासत को विश्व के सामने लाने का संकल्प है।”
483 करोड़ की लागत, 1 करोड़ से ज्यादा पांडुलिपियों का सर्वे
➡️ इस मिशन के तहत 483 करोड़ रुपये की लागत से देशभर में 1 करोड़ से अधिक पांडुलिपियों का सर्वेक्षण, दस्तावेजीकरण और विश्लेषण किया जा रहा है।
➡️ आयुर्वेद, खगोलशास्त्र, गणित, दर्शन और साहित्य जैसे विषयों में संकलित ज्ञान को डिजिटल तकनीक से संरक्षित करने और दुनिया तक पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है।
वैश्विक बौद्धिक नेतृत्व की ओर भारत
अमित शाह ने कहा कि यह आयोजन सिर्फ प्राचीन ज्ञान का पुनर्जनन नहीं करेगा, बल्कि भारत को “वैश्विक बौद्धिक नेतृत्व के केंद्र” के रूप में स्थापित करेगा।
सम्मेलन में दुनियाभर के विद्वान, शोधार्थी और युवा शामिल हुए, जिन्होंने भारत की समृद्ध परंपराओं पर गहन विचार-विमर्श किया।
प्राचीन से डिजिटल युग तक
सम्मेलन में इस बात पर भी चर्चा हुई कि कैसे डिजिटल तकनीक के जरिए इन दुर्लभ पांडुलिपियों को संरक्षित कर वैश्विक स्तर पर सुलभ बनाया जा सकता है।
अमित शाह ने कहा कि भारत की सांस्कृतिक और वैज्ञानिक विरासत को सहेजना आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का बड़ा स्रोत बनेगा।
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