
नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले, जिसमें 26 निर्दोष नागरिकों की मौत हुई, के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है। इस हमले के लिए पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठनों को जिम्मेदार मानते हुए भारत ने कूटनीतिक और रणनीतिक स्तर पर सख्त कदम उठाने शुरू कर दिए हैं।
भारत का जवाबी एक्शन प्लान
एयरस्पेस बंद करने की तैयारी
भारत सरकार ने संकेत दिए हैं कि वह पाकिस्तान के लिए अपने हवाई क्षेत्र को बंद करने पर गंभीरता से विचार कर रही है। इससे पाकिस्तान की नागरिक उड्डयन सेवाओं को भारी नुकसान झेलना पड़ सकता है। वर्तमान में पाकिस्तान के विमान भारत के हवाई क्षेत्र से होकर चीन और दक्षिण-पूर्व एशिया तक तेजी से पहुँचते हैं। अगर भारत एयरस्पेस बंद करता है, तो उड़ान की दूरी 805 किमी से बढ़कर 3,312 किमी तक हो सकती है। इससे न सिर्फ उड़ान का समय बढ़ेगा (5:35 घंटे से अधिक), बल्कि ईंधन लागत और परिचालन व्यय में भी तीव्र वृद्धि होगी।
समुद्री मार्गों पर दबाव
भारत अब पाकिस्तान के लिए अपने समुद्री मार्गों को बंद करने पर भी विचार कर रहा है। इससे पाकिस्तान को अपने मालवाहक जहाजों के लिए वैकल्पिक और महंगे रास्ते तलाशने होंगे। पाकिस्तान का समुद्री व्यापार काफी हद तक भारतीय समुद्री रास्तों पर निर्भर है। वैकल्पिक रास्ते लंबे, असुरक्षित और अधिक खर्चीले हो सकते हैं, जिससे पाकिस्तान का निर्यात-आयात तंत्र बुरी तरह प्रभावित होगा।
सिंधु जल संधि भी पहले ही स्थगित
भारत पहले ही सिंधु जल संधि को आंशिक रूप से स्थगित कर चुका है। यह पाकिस्तान के लिए जल संसाधनों के दृष्टिकोण से एक बड़ा झटका है।
भारत का स्पष्ट संदेश: आतंकवाद पर कोई समझौता नहीं
भारत की इन रणनीतिक कार्रवाइयों को केवल पाकिस्तान को सबक सिखाने के रूप में नहीं देखा जा रहा, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय समुदाय को यह संदेश देने के लिए भी है कि भारत आतंकवाद के खिलाफ कठोर और निर्णायक नीति अपनाए हुए है।
विशेषज्ञों की राय
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यदि भारत ने एयरस्पेस और समुद्री मार्ग बंद किए, तो यह पाकिस्तान की आर्थिक और रणनीतिक स्थिति को जबरदस्त झटका देगा। पाकिस्तान की उड़ानें और व्यापार मार्ग अंतरराष्ट्रीय मानकों पर भी कमजोर पड़ सकते हैं।
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