
नई दिल्ली में आयोजित 5वें राजभाषा सम्मेलन में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने देशवासियों को हिंदी दिवस की शुभकामनाएं दीं और भारतीय भाषाओं की सांस्कृतिक शक्ति पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “हमारा लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि हिंदी और अन्य भारतीय भाषाएं केवल संचार का माध्यम न बनें, बल्कि प्रौद्योगिकी, विज्ञान, न्याय, शिक्षा और प्रशासन की आधारशिला बनें।”
शाह ने डिजिटल इंडिया, ई-गवर्नेंस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग के दौर में भारतीय भाषाओं को “भविष्य में सक्षम और वैश्विक तकनीकी प्रतिस्पर्धा में प्रेरक शक्ति” बताकर इनके महत्व को रेखांकित किया।
भारतीय भाषाओं की विरासत पर गर्व
गृह मंत्री ने कहा कि भारत मूलतः भाषा-प्रधान राष्ट्र है। “हिमालय से लेकर दक्षिण के समुद्र तटों तक, रेगिस्तान से लेकर गांव की चौपालों तक, भाषाओं ने हर परिस्थिति में मनुष्य को संगठित रहने और संचार एवं अभिव्यक्ति के माध्यम से आगे बढ़ने का रास्ता दिखाया है।” उन्होंने याद दिलाया कि भारतीय भाषाएं स्वतंत्रता संग्राम में प्रतिरोध की आवाज बनीं और “वंदे मातरम” व “जय हिंद” जैसे नारे इसी भाषाई चेतना से जन्मे।
संविधान में हिंदी की भूमिका
अमित शाह ने कहा कि 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने देवनागरी लिपि में हिंदी को भारत संघ की आधिकारिक भाषा के रूप में अपनाया। “संविधान का अनुच्छेद 351 हिंदी को भारत की सामासिक संस्कृति का प्रभावी माध्यम बनाने का दायित्व सौंपता है।”
उन्होंने यह भी बताया कि 2014 से केंद्र सरकार ने सरकारी कामकाज में हिंदी के प्रयोग को लगातार बढ़ावा दिया है और 2024 में सभी प्रमुख भारतीय भाषाओं के बीच निर्बाध अनुवाद सुनिश्चित करने के लिए भारतीय भाषा अनुभाग की स्थापना की गई।
‘सारथी’ ऐप से होगा आसान अनुवाद
हिंदी दिवस पर अमित शाह ने सबसे बड़ा ऐलान किया “यहां ‘सारथी’ का ज़िक्र हुआ। ये एक अनुवाद ऐप है जो हिंदी से भारत की अन्य भाषाओं में आसान अनुवाद करता है। मैं देश की सभी सरकारों और मुख्यमंत्रियों से गर्व से कहना चाहता हूं—मुझे अपनी भाषा में लिखें; केंद्रीय गृह मंत्रालय आपको आपकी भाषा में जवाब देगा।”
शाह ने बताया कि चाहे पत्र तमिल, तेलुगु, मलयालम, बंगाली, पंजाबी या मराठी में हो, ‘सारथी’ उसे हिंदी में और फिर वापस संबंधित भाषा में अनुवाद कर देगा। आने वाले दिनों में इसके प्रशिक्षण और उन्नयन का काम जारी रहेगा।
भारतीय भाषाओं को तकनीक से जोड़ने का संकल्प
अमित शाह ने स्पष्ट किया कि आने वाले वर्षों में भारतीय भाषाओं को प्रौद्योगिकी और शासन में अहम भूमिका मिलेगी। उनका संदेश साफ है—भाषा ही भारत की आत्मा है, और अब तकनीक के सहारे यह आत्मा और सशक्त होकर दुनिया को नेतृत्व देगी।
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