
भोपाल। भारतीय जनता पार्टी को सावन से पहले नया राष्ट्रीय अध्यक्ष नहीं मिलेगा! पार्टी के उच्च पदों पर बैठकों और रणनीतिक मंथन के बावजूद, जेपी नड्डा के उत्तराधिकारी के नाम पर अभी भी असमंजस बना हुआ है। पार्टी के संविधान और संगठनात्मक प्रक्रिया के अनुसार, राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव तभी हो सकता है जब राज्यों में संगठनात्मक चुनाव पूरे हो जाएं। यही कारण है कि भले ही बीजेपी के संगठनात्मक चुनावों की रफ्तार बढ़ी हो, लेकिन तीन संभावित नामों पर सहमति न बन पाने के कारण देरी तय मानी जा रही है।
37 में से 19 राज्यों में अध्यक्ष बदलने जरूरी
पार्टी सूत्रों के अनुसार, 37 में से अभी केवल 16 राज्यों में नए प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किए गए हैं। बाकी बचे 19 राज्यों में नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करना अनिवार्य है। इस सप्ताह के अंत तक मिजोरम, पुडुचेरी, हिमाचल प्रदेश, चंडीगढ़, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में भी नई नियुक्तियों की घोषणा हो सकती है।
कुछ राज्यों में बदलाव नहीं:
➡️ महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश में वर्तमान अध्यक्ष को ही बनाए रखने की संभावना
➡️ तेलंगाना में स्थिति उलझी, विधायक राजा सिंह का इस्तीफा और रामचंदर राव की अटकलें
नड्डा का कार्यकाल कब खत्म हुआ?
जेपी नड्डा जनवरी 2020 में राष्ट्रीय अध्यक्ष बने थे। उनका कार्यकाल जनवरी 2023 में समाप्त होना था, लेकिन लोकसभा चुनाव 2024 और कुछ अहम राज्यों के विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए दो बार कार्यकाल बढ़ाया गया। अब उनके उत्तराधिकारी को बिहार विधानसभा चुनाव समेत 2026 तक पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल और असम जैसे राज्यों में होने वाले चुनावों का नेतृत्व करना होगा।
राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव कैसे होता है?
संगठनात्मक चुनाव पूरे होने के बाद
नामांकन प्रक्रिया होती है
आमतौर पर एक ही उम्मीदवार सामने आता है
निर्विरोध चयन की परंपरा
कौन हैं वो तीन संभावित नाम?
हालांकि पार्टी ने नामों की औपचारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन सूत्रों के अनुसार तीन दिग्गज नेताओं के नाम पर मंथन चल रहा है। पार्टी के शीर्ष नेतृत्व में अभी भी सहमति नहीं बन सकी है। पार्टी सूत्रों का कहना है,"सावन के बाद ही नए अध्यक्ष की तस्वीर साफ हो पाएगी, तब तक जेपी नड्डा संगठनात्मक कार्य संभालते रहेंगे।"
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