
मुंबई की सियासत में वह हो गया जिसकी किसी ने कल्पना नहीं की थी। देश की सबसे अमीर नगर पालिका बीएमसी पर पहली बार भारतीय जनता पार्टी ने बहुमत का परचम लहरा दिया है। मुंबई की जनता ने देवेंद्र फडणवीस और एकनाथ शिंदे की जोड़ी पर भरोसा जताते हुए ‘ट्रिपल इंजन सरकार’ की राह खोल दी है। वहीं 25 साल तक बीएमसी पर राज करने वाले ठाकरे परिवार को करारा झटका लगा है।
ठाकरे परिवार का जादू नहीं चला
बीएमसी चुनाव में 20 साल बाद राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे एक साथ नजर आए थे। माना जा रहा था कि यह एकजुटता शिवसेना के लिए संजीवनी साबित होगी, लेकिन नतीजे बिल्कुल उलट आए। मुंबई के मतदाताओं ने इस बार ठाकरे नेतृत्व को नकारते हुए भाजपा को मौका दिया। कांग्रेस अकेले मैदान में उतरी और 15 सीटें जीतकर दहाई का आंकड़ा पार करने में सफल रही, मगर सत्ता की दौड़ से काफी दूर रह गई।
नागपुर से गूंजेगा जीत का शोर
महाराष्ट्र की अन्य नगरपालिकाओं के नतीजों में भी भाजपा का दबदबा दिखा है। पार्टी की इस ऐतिहासिक जीत का जश्न नागपुर में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के आवास पर मनाया जाएगा, जहां मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस समेत कई बड़े नेता मौजूद रहेंगे। इसे महाराष्ट्र की राजनीति में नए दौर की शुरुआत माना जा रहा है।
आंकड़ों में समझें पूरा रिजल्ट
राज्य के कुल 2869 वार्डों में चुनाव हुए, जिनमें से 2471 के परिणाम आ चुके हैं।
भाजपा: 1243
शिवसेना (शिंदे): 333
कांग्रेस: 264
शिवसेना (ठाकरे): 121
एनसीपी (अजित): 147
एनसीपी (शरद): 27
मनसे: 14
बीएमसी के 227 वार्डों की तस्वीर:
भाजपा: 90
शिवसेना (ठाकरे): 72
कांग्रेस: 15
एनसीपी (अजित): 3
एआईएमआईएम: 6
मनसे: 8
निर्दलीय: 4
क्यों खास है यह जीत?
बीएमसी का बजट कई राज्यों से भी बड़ा है, इसलिए इसे देश की सबसे ताकतवर नगर पालिका माना जाता है। भाजपा का यहां काबिज होना सिर्फ स्थानीय नहीं बल्कि राष्ट्रीय राजनीति के लिहाज से भी बड़ा संदेश है। विश्लेषकों का मानना है कि मुंबई में मिली यह जीत आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों की दिशा तय कर सकती है।
पाठकों की राय (0)
इस खबर पर अभी कोई कमेंट नहीं है। पहले आप लिखें!

