
श्रीनगर की उतररात्रि में एक ऐसा धमाका हुआ, जिसने न सिर्फ नौगाम पुलिस स्टेशन को हिला दिया, बल्कि पूरा इलाके दहशत में झुलस उठा। शुक्रवार रात लगभग 11:20 बजे उस वक्त भयंकर विस्फोट हुआ, जब पुलिस और फोरेंसिक टीम हरियाणा के फरीदाबाद से जब्त किए गए ‘व्हाइट-कॉलर’ आतंकी मॉड्यूल के विस्फोटकों का नमूना ले रही थी। इस हादसे में कम से कम 9 लोग मारे गए हैं और 29 से ज्यादा घायल हैं, जिनमें अधिकांश पुलिसकर्मी शामिल हैं।
जांच में खुलासा: 360 किलो विस्फोटक था स्टोर
पुलिस के शुरुआती बयान के मुताबिक, यह विस्फोट 36ō किलोग्राम विस्फोटक (जैसे अमोनियम नाइट्रेट, पोटैशियम नाइट्रेट, सल्फर आदि) का हिस्सा था, जिसे फरीदाबाद (हरियाणा) में पकड़े गए एक ‘व्हाइट-कॉलर’ मॉड्यूल से जब्त किया गया था। बताया जा रहा है कि विस्फोट रात को उस समय हुआ, जब नमूनों की जांच की जा रही थी — यानी यह हमला नहीं, संभवतः दुर्घटना थी।
सीसीटीवी में कैद मंजर: भीषणता की तस्वीर
नौगाम पुलिस स्टेशन के पास लगे CCTV कैमरों ने पूरे विनाशकारी पल को रिकॉर्ड कर लिया। फुटेज में धुआं, तेज लपटें और धमाके के बाद जोरदार कंपन दिखते हैं। आसपास के घरों की खिड़कियां टूट जाती दिख रही हैं। कुछ वीडियो में दमकलकर्मी आग बुझाने में लगे हुए हैं, जबकि स्टेशन से उठता धुआँ और मलबा साफ नजर आ रहा है।
शवों की पहचान और गंभीर घायल: राहत-कार्य जारी
घायलों को 92 आर्मी बेस हॉस्पिटल और SKIMS सौरा हॉस्पिटल में भर्ती कर इलाज किया जा रहा है। मृतकों की अभी पहचान की जा रही है — पुलिस और फॉरेंसिक टीम दोनों ही स्तर पर जांच तेज कर दी गई है। अधिकारियों ने माना है कि विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि शरीर के अंग घटना स्थल से दूर तक (लगभग 300 मीटर) खुलासा हुए थे।
एंगल ऑफ इन्वेस्टिगेशन: साजिश या लापरवाही?
शुरुआती जांच में दो संभावना प्रमुख हैं:
➡️ जांच की गई विस्फोटक सामग्री में लापरवाही — सुरक्षित जांच प्रोटोकॉल का उल्लंघन, या नमूना लेने के दौरान चेकिंग में गलती।
➡️ साजिश के एंगल — हालांकि फिलहाल अधिकतर रिपोर्ट्स की मानें तो पुलिस ने अभी इसे आतंकी हमले के रूप में नकारते हुए इसे “दुर्घटना” करार दिया है।
➡️ यह विस्फोट उसी थाने में हुआ है, जहाँ पहले से ही ‘व्हाइट-कॉलर’ टेरर मॉड्यूल की जांच चल रही थी, जो डॉक्टरों और अन्य प्रोफेशनल्स की भागीदारी के साथ सक्रिय बताया गया था।
➡️ उस मॉड्यूल की जांच पोस्टर जांच से शुरू हुई थी, जब अक्टूबर में नौगाम और बुनपोरा इलाकों में पुलिस को धमकी भरे पोस्टर मिले थे।
➡️ इस पूरे नेटवर्क की जड़ हरियाणा (फरीदाबाद) तक पहुंची थी जहाँ से यह विस्फोटक जब्त किया गया था।
प्रभाव और आगे का खतरा
यह घटना न सिर्फ शोक और क्षति का संदेश देती है, बल्कि सुरक्षा एजेंसाओं में बड़ी चूक की आशंका को भी बढ़ा रही है। इतने बड़े पैमाने पर विस्फोटकों को एक पुलिस स्टेशन में रखना, और फिर उन्हें जांच के लिए वहां ही प्रोसेस करना, एक गंभीर सुरक्षा जोखिम बन सकता है। उच्च स्तरीय जांच की मांग अब जोर पकड़ रही है — यह देखना होगा कि क्या प्रोटोकॉल का उल्लंघन हुआ था, या कोई अंदरूनी साजिश रही।
ऐसे विस्फोट से आतंकवाद की रणनीति में बदलाव की भी आशंका बनती है — विशेष रूप से “व्हाइट-कॉलर” मॉड्यूल के मामले में, जहाँ प्रोफेशनल्स और डॉक्टर शामिल बताए गए हैं।
स्थानीय नागरिकों में भी भय है कि अगली बार इसी तरह की विफलता और भी बड़े परिणाम ला सकती है, खासकर तब जब विस्फोट इतना शक्तिशाली हो कि उसकी गूंज और प्रभाव 300 मीटर से आगे तक पहुंचे।
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