
नई दिल्ली। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोगने एक महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए 70 वर्ष या उससे अधिक उम्र के कैदियों को प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत वय वंदना योजना का लाभ देने का निर्देश दिया है। ये जेल में बंद बुजुर्ग कैदियों के लिए एक राहत भरी खबर है। अब सिर्फ इसलिए किसी कैदी को सरकारी स्वास्थ्य योजना से वंचित नहीं किया जा सकेगा क्योंकि वह जेल में है।
अब जेल में भी मिलेगी 5 लाख तक की मुफ्त स्वास्थ्य सुविधा
NHRC के आदेश के अनुसार, सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के जेल महानिदेशकों को निर्देश दिया गया है कि वे 70 साल या उससे अधिक उम्र के सभी योग्य कैदियों को आयुष्मान योजना के तहत पंजीकृत करें। इसके तहत इन बुजुर्ग कैदियों को भी 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज मिल सकेगा।आयोग ने यह स्पष्ट किया है कि जेल में बंद व्यक्ति भी भारत के नागरिक हैं और उन्हें स्वास्थ्य का मूलभूत अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्राप्त है।
शिकायत से हुआ बदलाव, चार हफ्तों में मांगी गई थी रिपोर्ट
यह आदेश एक शिकायत के बाद आया जिसमें कहा गया था कि वरिष्ठ नागरिकों के लिए चलाई जा रही वय वंदना योजना का लाभ जेलों में बंद बुजुर्ग कैदियों को भी मिलना चाहिए। इस पर कार्रवाई करते हुए NHRC ने न सिर्फ शिकायत को सही माना, बल्कि सभी जेल अधिकारियों को चार हफ्तों के भीतर प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। इसमें यह विवरण भी देना होगा कि कितने बुजुर्ग कैदियों को योजना से जोड़ा गया है।
NHRC ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का दिया हवाला
आयोग ने अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट के उस ऐतिहासिक निर्णय का भी उल्लेख किया जिसमें कहा गया था कि राज्य की हिरासत में रह रहे व्यक्ति के स्वास्थ्य की जिम्मेदारी सरकार की होती है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया था कि कैदियों को उचित चिकित्सा सहायता प्राप्त करने का अधिकार भी जीवन के अधिकार के अंतर्गत आता है।
फैसला बना नजीर
NHRC का यह निर्णय जेलों में मानवाधिकारों की स्थिति को सुधारने की दिशा में एक प्रेरणादायक कदम माना जा रहा है। इससे न केवल बुजुर्ग कैदियों को सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर मिलेगा, बल्कि यह सरकार की समावेशी और संवेदनशील नीतियों की ओर भी संकेत करता है।
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