
अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में भारत की भूमिका एक बार फिर केंद्र में आ गई है। अमेरिका ने गाजा में स्थायी शांति स्थापित करने के लिए बनाए जा रहे ‘गाजा पीस बोर्ड’ में भारत को शामिल होने का न्योता दिया है। यह योजना अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पहल का दूसरा चरण मानी जा रही है, जिसका मकसद इजरायल और हमास के बीच चल रहे संघर्ष को पूरी तरह खत्म करना है। हालांकि युद्धविराम के बीच भी गाजा में हमलों की खबरें सामने आ रही हैं, जिससे हालात अब भी नाजुक बने हुए हैं।
अमेरिकी राजदूत ने किया ऐलान
भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोरे ने इस संबंध में आधिकारिक संदेश साझा किया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है। राजदूत के मुताबिक, इस पहल से गाजा में स्थायी शांति लाने में मदद मिलेगी और प्रभावशाली शासन व्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा, जिससे क्षेत्र में स्थिरता और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होगा।
60 देशों को भेजा गया निमंत्रण
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अमेरिका ने दुनिया के करीब 60 देशों को इस शांति बोर्ड का हिस्सा बनने का न्योता दिया है। अभी ज्यादातर देशों ने इस पर खुलकर प्रतिक्रिया नहीं दी है। इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने सार्वजनिक रूप से निमंत्रण स्वीकार किया है। दिलचस्प बात यह है कि पाकिस्तान को भी इस पहल में शामिल होने का प्रस्ताव मिला है। पाक विदेश विभाग के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने पुष्टि की कि इस्लामाबाद को वॉशिंगटन से आधिकारिक आमंत्रण प्राप्त हुआ है।
क्या है ‘गाजा पीस बोर्ड’?
डोनाल्ड ट्रंप ने 15 जनवरी 2026 को इस योजना के दूसरे चरण की घोषणा की थी।
इस बोर्ड की अध्यक्षता स्वयं अमेरिकी राष्ट्रपति करेंगे।
एक तकनीकी समिति गाजा के रोजमर्रा के प्रशासनिक कार्यों की निगरानी करेगी।
यह युद्धविराम फ्रेमवर्क का हिस्सा होगा, जिसका लक्ष्य क्षेत्र में स्थायी स्थिरता लाना है।
गाजा के पुनर्निर्माण और विकास के लिए वैश्विक स्तर पर फंड जुटाने की रणनीति बनाई जाएगी।
अमेरिका का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय भागीदारी से ही गाजा को फिर से रहने लायक बनाया जा सकता है और दशकों पुराने संघर्ष का समाधान निकाला जा सकता है।
भारत की भूमिका क्यों अहम?
भारत लंबे समय से पश्चिम एशिया में संतुलित कूटनीति अपनाता रहा है। इजरायल और फिलिस्तीन दोनों के साथ उसके मजबूत संबंध हैं। ऐसे में गाजा पीस बोर्ड में भारत की भागीदारी शांति प्रक्रिया को नई दिशा दे सकती है और वैश्विक मंच पर भारत की साख और मजबूत होगी।
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