
नई दिल्ली। सियासत में कुछ भी अचानक नहीं होता... और जब अचानक उपराष्ट्रपति जैसे ऊँचे संवैधानिक पद से इस्तीफा दिया जाए, वो भी संसद के भीतर मानसून सत्र के पहले दिन — तो सवाल उठना लाज़मी है। सोमवार, 21 जुलाई 2025 को जब संसद की कार्यवाही शुरू हुई, किसी ने नहीं सोचा था कि देश को दिन के अंत तक नया उपराष्ट्रपति खोजने की नौबत आ जाएगी। लेकिन हुआ वही, जो किसी ने कल्पना भी नहीं की थी — जगदीप धनखड़ ने अपने पद से तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दे दिया।
धनखड़ बोले - 'स्वास्थ्य पहली प्राथमिकता है'
उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को भेजे अपने त्यागपत्र में लिखा, "स्वास्थ्य की प्राथमिकता और चिकित्सकीय सलाह का पालन करते हुए, मैं भारत के उपराष्ट्रपति पद से तत्काल प्रभाव से त्यागपत्र दे रहा हूं।"
उन्होंने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद को उनके सहयोग और मार्गदर्शन के लिए आभार प्रकट किया। साथ ही संसद के सदस्यों के स्नेह, सम्मान और समर्थन को 'जीवनभर के लिए संचित' अनुभव बताया।
धनखड़ ने लिखा, "भारत के आर्थिक विकास और अभूतपूर्व परिवर्तनकारी दौर का साक्षी बनना मेरे लिए सौभाग्य और संतोष का विषय रहा है। मुझे भारत के उज्ज्वल भविष्य और वैश्विक नेतृत्व क्षमता पर पूर्ण विश्वास है।"
सिब्बल ने की तारीफ़, कहा – 'एक साफ़ दिल वाले इंसान थे'
राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने कहा, "मैं उनके इस्तीफ़े के कारणों पर अटकलें नहीं लगाऊँगा। उन्होंने कहा है कि स्वास्थ्य कारणों से ऐसा हुआ है। वे राज्यसभा के सबसे सक्रिय सभापतियों में से एक थे। वे हमेशा हमें देश के लिए साथ मिलकर काम करने की सलाह देते थे। उनका दिल बहुत कोमल था – एक गर्म, सुनहरा दिल और साफ़ दिमाग वाला इंसान।"
'सिर्फ एक घंटे में क्या हो गया?' — इमरान मसूद का तीखा सवाल
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कहा, "वे पूरे दिन संसद भवन में थे। सिर्फ़ एक घंटे में ऐसा क्या हो गया कि उन्हें इस्तीफ़ा देना पड़ा? हम ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि वे स्वस्थ रहें, लेकिन द रीज़न... समझ नहीं आता।"
6 अगस्त 2022 को बने थे उपराष्ट्रपति
धनखड़ ने 6 अगस्त 2022 को भारत के 14वें उपराष्ट्रपति के रूप में शपथ ली थी। उन्होंने हमेशा संसदीय मर्यादाओं, लोकतांत्रिक संवाद और सौहार्द्रपूर्ण वातावरण को प्राथमिकता दी। सत्र के पहले ही दिन उन्होंने कहा था "राजनीति का सार टकराव नहीं, संवाद है। एक समृद्ध लोकतंत्र निरंतर टकराव की स्थिति में नहीं टिक सकता।"
स्वास्थ्य कारण या राजनीतिक संकेत?
सूत्रों के अनुसार, धनखड़ की तबीयत बीते कुछ महीनों से अस्थिर थी। डॉक्टरों की सलाह पर उन्होंने सक्रिय राजनीति से विराम लेने का फैसला किया। लेकिन राजनीतिक हलकों में इस इस्तीफे को लेकर कई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। क्या वाकई केवल स्वास्थ्य वजह है या कोई बड़ा घटनाक्रम आने वाला है?
अब आगे क्या? नया उपराष्ट्रपति जल्द तय हो सकता है
धनखड़ के इस्तीफे के बाद अब संविधान के तहत नए उपराष्ट्रपति के चुनाव की प्रक्रिया जल्द ही शुरू होगी। राजनीतिक दलों के बीच इस पर चर्चाएं तेज हो चुकी हैं।
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