
मुंबई की राजनीति एक बार फिर उबल पड़ी है! केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह के एक बयान ने ऐसा तूफ़ान खड़ा किया है कि अब मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस खुद मैदान में उतर आए हैं। उन्होंने साफ कहा है — IIT बॉम्बे का नाम बदलकर IIT मुंबई होना चाहिए, और इसके लिए वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय को औपचारिक पत्र लिखेंगे। बयान सामने आते ही पूरा विवाद और गरमा गया है।
विवाद की शुरुआत — आखिर कहा क्या था?
विवाद की जड़ है केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री जितेंद्र सिंह का IIT बॉम्बे के कार्यक्रम में दिया गया बयान। उन्होंने कहा, “जहां तक IIT बॉम्बे का सवाल है, भगवान का शुक्र है कि इसका नाम अब तक यही है। आपने इसे मुंबई नहीं किया।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि IIT मद्रास भी अब तक अपने पुराने नाम से ही चल रहा है। बस… इतना कहना था कि महाराष्ट्र की राजनीति भड़क उठी। मनसे और अन्य दलों ने इसे महाराष्ट्र और मुंबई का अपमान बताया।
फडणवीस का पलटवार — “हमारे लिए यह मुंबई ही है”
विवाद के बीच बुधवार को CM देवेंद्र फडणवीस सामने आए और उन्होंने स्पष्ट कहा, “हमारे लिए यह मुंबई ही है। बॉम्बे का नाम बदलकर मुंबई करने में भाजपा की बड़ी भूमिका रही है। हम IIT बॉम्बे का नाम बदलकर IIT मुंबई करने की मांग करेंगे।” फडणवीस ने ऐलान किया कि वह जल्द ही PM नरेंद्र मोदी और केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय को पत्र लिखेंगे।
राज ठाकरे ने बोला हमला — ‘मुंबई को महाराष्ट्र से अलग करने की साजिश’
मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने जितेंद्र सिंह के बयान को केंद्र सरकार की सोची-समझी चाल बताया। उन्होंने X (ट्विटर) पर लिखा, “मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह का बयान साफ दिखाता है कि सरकार की सोच क्या है। मुंबई हमेशा मराठी लोगों की रही है। इसे महाराष्ट्र से अलग करने की जो साजिश चली थी, उसे मराठी जनता ने नाकाम किया था। दशकों से पेट में भरी कड़वाहट अब बाहर निकल रही है।”
राज ठाकरे यहीं नहीं रुके। उन्होंने आगे लिखा, “जितेंद्र सिंह का न मुंबई से कोई कनेक्शन है, न महाराष्ट्र से। वह सिर्फ ‘शीर्ष नेतृत्व’ की पसंद पाने के लिए बोलते हैं। मुंबई नाम उन्हें इसलिए परेशान करता है क्योंकि यह हमारी असली देवी मुंबादेवी के नाम पर रखा गया है। मराठी लोग पीढ़ियों से यहां रहते आए हैं — और हम ही उन्हें चुभते हैं।” उन्होंने चेतावनी देते हुए दावा किया, “पहले मुंबई, फिर पूरा MMR गुजरात से जोड़ने की कोशिश होगी। समय आ गया है — मराठी लोगों, जागो!”
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