
भारत ने एक बार फिर दुनिया को चौंका दिया है। जिस देश को कभी “उभरती हुई अर्थव्यवस्था” कहकर देखा जाता था, वह अब सीधे वैश्विक आर्थिक महाशक्तियों की कतार में खड़ा है। केंद्र सरकार की आर्थिक समीक्षा के मुताबिक भारत अब दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है। यानी GDP के मामले में भारत ने जापान को पीछे छोड़ दिया है। सोशल मीडिया से लेकर नीति-निर्माताओं के गलियारों तक इस कामयाबी की चर्चा है, लेकिन इसी जश्न के बीच एक सवाल भी खड़ा हो रहा है – क्या भारत अमीर बन रहा है, या सिर्फ आंकड़े?
भारत की नई वैश्विक आर्थिक रैंकिंग
आर्थिक समीक्षा के मुताबिक भारत का सकल घरेलू उत्पाद यानी GDP अब लगभग 4.18 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर के आसपास पहुंच गया है। इसी के साथ भारत ने जापान को पीछे छोड़ते हुए दुनिया में चौथा स्थान हासिल कर लिया है। अब भारत से आगे सिर्फ अमेरिका, चीन और जर्मनी ही रह गए हैं। सरकारी रिपोर्ट बताती है कि यह रैंकिंग अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी IMF के 2025 और 2026 के लिए अपडेट किए गए अनुमानों पर आधारित है। अर्थशास्त्रियों के अनुसार भारत की मजबूत घरेलू खपत, बढ़ती खरीद क्षमता और लगातार किए जा रहे संरचनात्मक सुधारों ने इस छलांग को संभव बनाया है।
पिछले कुछ वर्षों में इंफ्रास्ट्रक्चर, डिजिटल इंडिया, स्टार्टअप कल्चर और सर्विस सेक्टर के विस्तार ने भारत की अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार दी है। यही वजह है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बना हुआ है।
2030 तक तीसरे पायदान पर पहुंचने की उम्मीद
सरकार का दावा है कि अगर यही रफ्तार बनी रही, तो आने वाले चार साल में भारत जर्मनी को भी पीछे छोड़ सकता है। अनुमान है कि 2030 तक भारत की अर्थव्यवस्था 7.3 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकती है और तब भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी इकॉनमी बन जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू खपत का बढ़ना, निर्यात नेटवर्क का विस्तार, सर्विस सेक्टर की मजबूती और इंफ्रास्ट्रक्चर में भारी निवेश इस लक्ष्य की रीढ़ बनेंगे। भारत में मिडिल क्लास की बढ़ती भूमिका भी इकॉनमी को बूस्ट देने में अहम साबित हो रही है।
तिमाही ग्रोथ ने दिखाई भारत की ताकत
वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी तिमाही में भारत की वास्तविक GDP वृद्धि दर 8.2 प्रतिशत दर्ज की गई है। यह पिछले तिमाही के 7.8% और उससे पहले की 7.4% की तुलना में कहीं बेहतर है। खास बात यह है कि यह पिछले छह तिमाहियों में सबसे ज्यादा ग्रोथ है। वैश्विक बाजार में मंदी और भू-राजनीतिक तनावों के बीच इतनी तेज़ ग्रोथ यह दिखाती है कि भारत की अर्थव्यवस्था अंदर से कितनी मजबूत हो चुकी है। घरेलू मांग, सरकारी खर्च और निजी निवेश – तीनों ही इस ग्रोथ में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं।
वैश्विक संस्थाओं ने भी लगाई मुहर
भारत की इस कामयाबी पर सिर्फ देश ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं भी मुहर लगा रही हैं। विश्व बैंक के मुताबिक 2026 में भारत की ग्रोथ रेट लगभग 6.5% रह सकती है। मूडीज़ का कहना है कि भारत आने वाले वर्षों में भी G20 देशों में सबसे तेज़ी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बना रहेगा। वहीं IMF ने 2026 के लिए भारत का GDP लगभग 4.51 ट्रिलियन डॉलर आंका है, जो जापान से आगे का आंकड़ा है।
भारत अमीर, लेकिन भारतीय अब भी गरीब?
यहां से कहानी का दूसरा पहलू शुरू होता है। भारत भले ही GDP के मामले में दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया हो, लेकिन प्रति व्यक्ति आय अब भी चिंता का विषय है। भारत की प्रति व्यक्ति आय लगभग 2,694 अमेरिकी डॉलर है, जबकि जापान में यह करीब 32,487 डॉलर और जर्मनी में 56,103 डॉलर के आसपास है। यानी देश का आकार भले ही बड़ा हो गया हो, लेकिन आम भारतीय की जेब अभी भी हल्की ही है। यही वजह है कि अब सरकार और नीति-निर्माताओं के सामने असली चुनौती सिर्फ GDP बढ़ाना नहीं, बल्कि समावेशी विकास सुनिश्चित करना है। रोजगार के नए मौके, स्किल डेवलपमेंट, सामाजिक सुरक्षा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना आने वाले वर्षों की सबसे बड़ी जरूरत बन चुके हैं।
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