
भारत के पहले निजी अंतरिक्ष मिशन में शामिल ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला 18 दिन बाद सकुशल पृथ्वी पर लौट आए हैं। स्पेसएक्स के ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट ने 15 जुलाई दोपहर 3 बजे कैलिफोर्निया के तट पर सफलतापूर्वक स्प्लैशडाउन किया। अंतरिक्ष से उनकी वापसी पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर देश की भावनाएं साझा करते हुए कहा, "शुभांशु ने अपने समर्पण, साहस से अरबों सपनों को प्रेरित किया है। यह गगनयान की दिशा में एक और मील का पत्थर है।"
कैसे हुआ वापसी का सफर
14 जुलाई, 2:15 PM: शुभांशु और उनके तीन साथियों ने स्पेसक्राफ्ट में प्रवेश किया।
4:45 PM: स्पेसक्राफ्ट ने ISS के हार्मनी मॉड्यूल से अनडॉक किया।
15 जुलाई, 3:00 PM (IST): करीब 23 घंटे की यात्रा के बाद कैलिफोर्निया तट पर हुआ स्प्लैशडाउन।
अंतरिक्ष में किए 60 से ज्यादा वैज्ञानिक प्रयोग
ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने 18 दिन के इस मिशन के दौरान 60 से अधिक वैज्ञानिक प्रयोगों में भाग लिया। इनमें भारत के 7 प्रयोग भी शामिल रहे:
अंतरिक्ष में मेथी और मूंग के बीज उगाए
हड्डियों की सेहत पर असर का परीक्षण
"स्पेस माइक्रोएल्गी" प्रयोग में भागीदारी
भारत के कृषि, चिकित्सा और जैव प्रौद्योगिकी से जुड़े प्रयोग
प्रधानमंत्री से अंतरिक्ष से संवाद
28 जून 2025 को शुभांशु ने प्रधानमंत्री मोदी से अंतरिक्ष से लाइव बात की। पीएम मोदी ने हल्के-फुल्के अंदाज़ में पूछा –
“आप गाजर का हलवा लेकर गए थे, साथियों को खिलाया क्या?”
इस पर शुभांशु बोले – “हां, साथियों के साथ बैठकर खाया।”
छात्रों से रेडियो पर संवाद
3, 4 और 8 जुलाई को शुभांशु ने तिरुवनंतपुरम, बेंगलुरु और लखनऊ के 500+ छात्रों से हैम रेडियो पर संवाद किया। उद्देश्य था – STEM (विज्ञान, तकनीक, इंजीनियरिंग, गणित) में रुचि बढ़ाना।
पृथ्वी की शानदार तस्वीरें भेजीं
ISS के कपोला मॉड्यूल (जहां से पृथ्वी का सबसे सुंदर दृश्य दिखता है) से शुभांशु ने पृथ्वी की अद्भुत तस्वीरें भेजीं। ये तस्वीरें युवाओं के लिए प्रेरणास्त्रोत बन चुकी हैं।
कब लौटेंगे भारत?
शुभांशु 17 अगस्त तक भारत लौट सकते हैं।
NASA प्रोटोकॉल के अनुसार, स्पेस मिशन के बाद 7 दिन का मेडिकल और रिहैबिलिटेशन होता है, जिससे शरीर पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण में फिर ढल सके।
शुभांशु शुक्ला की ऐतिहासिक यात्रा केवल अंतरिक्ष की नहीं, बल्कि भारत के आत्मविश्वास, तकनीकी क्षमता और भविष्य की उड़ान की गवाही है। उनकी वापसी पर पूरा देश गर्वित है और यह मिशन हमारे गगनयान जैसे अभियानों की नींव और भी मजबूत करेगा।
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