
नई दिल्ली, 9 अप्रैल 2025
भारत ने समुद्री सुरक्षा को अभेद्य बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए फ्रांस के साथ 26 राफेल मरीन लड़ाकू विमानों की मेगा डील को मंजूरी दे दी है। करीब 63,000 करोड़ रुपये की इस ऐतिहासिक डील को हाल ही में कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की मंजूरी प्राप्त हुई है, और जल्द ही इस पर औपचारिक हस्ताक्षर किए जाने की उम्मीद है।
इस रक्षा सौदे में 22 सिंगल-सीटर और 4 ट्विन-सीटर राफेल मरीन जेट्स शामिल हैं, जो विशेष रूप से भारतीय विमानवाहक पोतों - INS विक्रांत और INS विक्रमादित्य से संचालित किए जाएंगे।
राफेल मरीन: तकनीकी दृष्टिकोण से उन्नत और सामरिक रूप से निर्णायक
फ्रांसीसी कंपनी दसॉ एविएशन द्वारा निर्मित राफेल मरीन विमान अत्याधुनिक स्टील्थ तकनीक, मल्टीरोल क्षमताओं और समुद्री अभियानों के अनुकूल डिज़ाइन से लैस हैं। इन विमानों में शामिल हैं:
मेटियोर (Meteor) एयर-टू-एयर मिसाइलें
स्कैल्प क्रूज़ मिसाइलें (गहरे निशाने के लिए)
एंटी-शिप मिसाइलें
उन्नत रडार और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम
इन हथियारों और प्रणालियों के कारण राफेल मरीन न केवल समुद्री निगरानी में सक्षम हैं, बल्कि यह शत्रु के ठिकानों पर लंबी दूरी तक सटीक वार करने में भी सक्षम हैं।
हिंद महासागर में बढ़ती सामरिक प्रतिस्पर्धा
भारत का यह कदम हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में अपनी सामरिक स्थिति को और अधिक मजबूत करता है। जहां पाकिस्तान पहले से ही भारतीय वायुसेना के 36 राफेल विमानों से दबाव में है, वहीं अब नौसेना में राफेल मरीन की तैनाती से उसकी सामुद्रिक सीमाएं और अधिक असुरक्षित महसूस हो सकती हैं।
चीन के लिए यह और भी चिंताजनक स्थिति है, क्योंकि वह दक्षिण चीन सागर और हिंद महासागर में प्रभाव बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में राफेल मरीन भारत को समुद्री डोमिनेंस और निगरानी में रणनीतिक बढ़त दिलाएगा।
राजनयिक और औद्योगिक दृष्टिकोण से डील का महत्व
यह डील भारत-फ्रांस के रक्षा संबंधों को नई ऊंचाइयों तक ले जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार, इसमें तकनीकी हस्तांतरण, स्थानीय उत्पादन, और मेक इन इंडिया पहल को भी शामिल किया जा सकता है। इसके साथ-साथ फ्रांस प्रशिक्षण, मेंटेनेंस और लॉजिस्टिक्स का सहयोग भी देगा, जिससे भारतीय नौसेना इन विमानों का जल्द संचालन शुरू कर सकेगी।
यह सौदा ऐसे समय में हो रहा है जब अमेरिका द्वारा भारत पर 26% रेसिप्रोकल टैरिफ लगाए गए हैं। ऐसे में यह डील भारत की रणनीतिक आत्मनिर्भरता और बहुपक्षीय सहयोग की नीति को रेखांकित करती है।
क्षेत्रीय शक्ति संतुलन की नई दिशा
राफेल मरीन की तैनाती भारत को QUAD जैसे रणनीतिक समूहों में अधिक प्रभावशाली बनाती है। अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसे सहयोगी देशों के साथ हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की भूमिका पहले से कहीं अधिक सशक्त होगी।
भारत का आत्मविश्वास, पड़ोसियों की चिंता
राफेल मरीन के साथ भारतीय नौसेना की मारक क्षमता और सामरिक पहुंच में क्रांतिकारी बदलाव आने वाला है। यह सौदा न केवल भारत की रक्षा नीति में निर्णायक मोड़ लाता है, बल्कि यह दक्षिण एशिया और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शक्ति संतुलन को नए सिरे से परिभाषित कर सकता है।
पाठकों की राय (0)
इस खबर पर अभी कोई कमेंट नहीं है। पहले आप लिखें!

