
नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर एक बड़ा आर्थिक वार करते हुए 25% बेस और 25% अतिरिक्त यानी कुल 50% टैरिफ लगा दिया है। ट्रंप का आरोप है कि भारत ने रूस से तेल खरीदकर ‘गलत कदम’ उठाया है और इसे रोकने से इनकार कर दिया है। लेकिन भारत ने साफ कर दिया है—राष्ट्र हित सर्वोपरि है और सस्ती दर पर रूस से तेल खरीद जारी रहेगी।
सूत्रों के मुताबिक, ट्रंप की नाराज़गी का एक कारण यह भी है कि भारत ने पाकिस्तान के साथ हुए सीज़फायर का क्रेडिट उन्हें नहीं दिया। बावजूद इसके, भारत ने उनकी धमकियों को दरकिनार कर रूस के साथ रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने का मन बना लिया है।
डोभाल के बाद अब जयशंकर रूस रवाना
पिछले हफ्ते राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल रूस दौरे पर गए थे, और अब विदेश मंत्री एस. जयशंकर 21 अगस्त को मॉस्को पहुंचेंगे। वहां वे रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव से मुलाकात करेंगे और ऊर्जा, रक्षा और व्यापार सहित कई अहम मुद्दों पर बातचीत करेंगे।
सूत्रों का कहना है कि जयशंकर का यह दौरा सिर्फ औपचारिक नहीं है—यह भारत का अमेरिका को साफ संदेश है कि हम अपने रणनीतिक फैसले स्वतंत्र रूप से लेंगे।
पुतिन भी आएंगे भारत
जयशंकर न केवल लावरोव से मिलेंगे बल्कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से भी मुलाकात करेंगे। पुतिन इस साल के अंत तक भारत आने पर सहमत हो चुके हैं और तारीख की आधिकारिक घोषणा जल्द होगी। माना जा रहा है कि पुतिन के इस दौरे में कई बड़े रक्षा और ऊर्जा समझौते फाइनल हो सकते हैं।
अमेरिका को सीधा संदेश
डोभाल का रूस जाना, उसके बाद जयशंकर का दौरा और फिर पुतिन का भारत आगमन—ये तीनों घटनाएं मिलकर ट्रंप प्रशासन को स्पष्ट संकेत दे रही हैं कि भारत-रूस के रिश्ते पर किसी तीसरे देश की धमकी का असर नहीं होगा।
विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “भारत एक संप्रभु राष्ट्र है और हम अपने हित में फैसले लेंगे, चाहे वह तेल खरीद हो या रक्षा सहयोग।”
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