
नई दिल्ली।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आगामी ब्रिटेन यात्रा से ठीक पहले भारत ने यूरोपियन यूनियन (EU) की धमकियों पर सख्त और स्पष्ट प्रतिक्रिया दी है। विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने सोमवार को दो टूक कहा कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और रूस से तेल खरीदने के फैसले में कोई भी बाहरी दबाव असर नहीं डालेगा। मिसरी ने कहा, "हमारी सरकार के लिए ऊर्जा सुरक्षा सर्वोपरि है। हम भारतीयों की ऊर्जा ज़रूरतों को ध्यान में रखकर ही कोई निर्णय लेंगे।"
भारत का सख्त संदेश 'दोहरे मापदंड नहीं चलेंगे'
विदेश सचिव ने दोहरे मापदंडों को लेकर यूरोपियन यूनियन को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा, अगर यूरोप को अपनी सुरक्षा की चिंता है, तो बाकी दुनिया को भी अपने क्षेत्रीय और आर्थिक संकटों को लेकर गंभीरता से देखना होगा। "ऊर्जा बाजार की वास्तविकता को वैश्विक स्तर पर समझने की जरूरत है। मिसरी ने कहा, बातचीत संतुलन और परिपक्व दृष्टिकोण के साथ होनी चाहिए।
ईयू की नई पाबंदियां भारत के लिए चुनौती
यूक्रेन युद्ध के चलते यूरोपियन यूनियन ने रूस पर कई नई पाबंदियां लगाई हैं, जिनमें कच्चे तेल और उससे बने उत्पादों के आयात पर रोक शामिल है। थिंक टैंक GTRI के मुताबिक, ईयू की इन पाबंदियों से भारत जैसे देश प्रभावित हो सकते हैं, जो रूसी तेल खरीदकर उसे रिफाइन कर यूरोप में ईंधन निर्यात करते हैं।
वित्त वर्ष 2024 में भारत का ईयू को पेट्रोलियम निर्यात $19.2 बिलियन था।
लेकिन वित्त वर्ष 2025 में यह गिरकर सिर्फ $15 बिलियन रह गया — यानी 27.1% की गिरावट।
इसी दौरान भारत ने $50.3 बिलियन का रूसी कच्चा तेल आयात किया, जो उसके कुल तेल आयात का एक-तिहाई से ज्यादा है।
अमेरिका की धमकी "रूसी तेल लोगे, तो टैरिफ झेलो"
अमेरिकी नेताओं ने ब्रिक्स देशों—भारत, चीन और ब्राजील—को चेतावनी दी है कि अगर वे रूस तेल खरीदते रहे, तो उन्हें कड़े आर्थिक प्रतिबंधों और टैरिफ का सामना करना पड़ेगा।
भारत की स्पष्ट नीति, हित सर्वोपरि
भारत ने बार-बार स्पष्ट किया है कि वह किसी दबाव में नहीं आएगा और अपनी ऊर्जा ज़रूरतों को ध्यान में रखते हुए ही रणनीति बनाएगा। विदेश नीति विशेषज्ञों का मानना है कि भारत वैश्विक दबाव के बावजूद अपनी रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखने की दिशा में सही कदम उठा रहा है।
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