
भारतीय वायुसेना को और मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने फ्रांस से 114 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है। करीब 3.25 लाख करोड़ रुपए की इस मेगा डील को अब अंतिम मंजूरी के लिए कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) के पास भेजा जाएगा। माना जा रहा है कि फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के फरवरी में भारत दौरे के दौरान इस सौदे पर अंतिम मुहर लग सकती है।
एयर डिफेंस और बॉर्डर सुरक्षा होगी मजबूत
रक्षा मंत्रालय के अनुसार नए राफेल विमानों की खरीद से भारतीय वायुसेना की मारक क्षमता में बड़ा इजाफा होगा। खासतौर पर सीमावर्ती इलाकों में तैनाती और एयर डिफेंस सिस्टम को मजबूत करने के लिए ये सौदा अहम माना जा रहा है। इससे तेजी से बदलते सुरक्षा हालात में भारत की रणनीतिक ताकत बढ़ेगी।
अन्य रक्षा प्रोजेक्ट्स को भी मिली मंजूरी
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाली समिति ने सिर्फ राफेल डील ही नहीं, बल्कि कॉम्बैट मिसाइल सिस्टम और एयर-शिप बेस्ड हाई एल्टीट्यूड स्यूडो सैटेलाइट्स से जुड़े प्रस्तावों को भी स्वीकृति दी है। इन सभी परियोजनाओं की कुल लागत लगभग 3.60 लाख करोड़ रुपए बताई जा रही है।
रक्षा बजट में बढ़ोतरी से आधुनिकीकरण को गति
केंद्रीय बजट 2026-27 में रक्षा मंत्रालय को 7.8 लाख करोड़ रुपए का आवंटन किया गया है, जो कुल बजट का 14.67% है। आधुनिकीकरण के लिए तय 2.19 लाख करोड़ रुपए में से 1.85 लाख करोड़ रुपए पूंजीगत खरीद के लिए निर्धारित किए गए हैं, जो पिछले साल की तुलना में करीब 24% ज्यादा है।
मेक इन इंडिया के तहत तैयार होंगे राफेल
सरकार इस डील को ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत आगे बढ़ाने जा रही है। फ्रांस की डसॉल्ट एविएशन एक भारतीय कंपनी के साथ मिलकर विमानों का निर्माण करेगी। हाल ही में कंपनी ने डसॉल्ट रिलायंस एयरोस्पेस लिमिटेड (DRAL) में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाकर 51% कर ली है, जिसमें रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर भी भागीदार है।
स्वदेशी तकनीक और हथियारों का होगा इस्तेमाल
नए राफेल जेट्स में भारतीय हथियार, मिसाइल और गोला-बारूद को इंटीग्रेट किया जाएगा। साथ ही सुरक्षित डेटा लिंक सिस्टम लगाया जाएगा, जिससे विमान भारतीय रडार और सेंसर नेटवर्क से सीधे जुड़ सकेंगे। एयरफ्रेम निर्माण के लिए टेक्नोलॉजी ट्रांसफर (ToT) भी दिया जाएगा, जिसमें इंजन निर्माता साफ्रान और एवियोनिक्स कंपनी थेल्स शामिल होंगी। टेक्नोलॉजी ट्रांसफर पूरा होने के बाद विमानों में 55 से 60 फीसदी तक स्वदेशी सामग्री होने की उम्मीद है।
भारत-फ्रांस रक्षा साझेदारी को मिलेगी नई मजबूती
विशेषज्ञों का मानना है कि यह डील भारत और फ्रांस के बीच रक्षा सहयोग को नई ऊंचाई दे सकती है। आने वाले वर्षों में भारतीय वायुसेना की ताकत और आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन को इससे बड़ा सहारा मिलने की संभावना है।
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