
लख़नऊ। बच्चों से कथित यौन शोषण के गंभीर आरोपों में दर्ज एफआईआर के बाद शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। प्रयागराज पुलिस ने जांच की रफ्तार तेज करते हुए वाराणसी में डेरा डाल लिया है, जहां पूछताछ और संभावित कार्रवाई को लेकर हलचल बढ़ गई है।
वाराणसी पहुंची पुलिस टीम, पूछताछ की तैयारी
एफआईआर दर्ज होने के बाद सोमवार दोपहर प्रयागराज पुलिस की एक टीम वाराणसी पहुंची। सूत्रों के मुताबिक, जांच अधिकारी शंकराचार्य से सीधे सवाल-जवाब कर सकते हैं। जरूरत पड़ने पर कानूनी प्रक्रिया के तहत गिरफ्तारी की संभावना भी जताई जा रही है। पुलिस पहले ही माघ मेला क्षेत्र में उस जगह का निरीक्षण कर चुकी है, जहां उनका शिविर लगा था। टीम ने इलाके के प्रवेश और निकास मार्गों का नक्शा तैयार किया है ताकि घटनाक्रम को समझा जा सके।
गिरफ्तारी की आशंका के बीच कानूनी सलाह
सुबह वाराणसी स्थित आश्रम में शंकराचार्य ने अपने वकीलों के साथ लंबी बैठक की। माना जा रहा है कि वे गिरफ्तारी से राहत पाने के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं। बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि वे जांच से भाग नहीं रहे और पुलिस का सामना करेंगे। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि जिन बच्चों का जिक्र किया जा रहा है, वे उनके गुरुकुल से जुड़े नहीं हैं।
जांच पर उठाए सवाल, दूसरे राज्य की एजेंसी की मांग
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान शंकराचार्य ने यूपी पुलिस की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि जांच किसी ऐसे राज्य की पुलिस से कराई जानी चाहिए जहां भाजपा की सरकार न हो। इस बयान के बाद मामला और राजनीतिक रंग लेता दिख रहा है।
शिकायत से लेकर FIR तक: पूरा घटनाक्रम समझिए
24 जनवरी: पहली शिकायत
शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी ने पुलिस कमिश्नर को लिखित शिकायत देकर माघ मेला 2026 और महाकुंभ 2025 के दौरान बच्चों के साथ कथित यौन शोषण का आरोप लगाया।
8 फरवरी: कोर्ट का दरवाजा
कार्रवाई न होने का आरोप लगाते हुए उन्होंने प्रयागराज की स्पेशल POCSO कोर्ट में याचिका दाखिल की।
13 और 21 फरवरी: बच्चों के बयान
दो बच्चों को कोर्ट में पेश किया गया और बाद में उनके बयान कैमरे के सामने दर्ज किए गए। कोर्ट के निर्देश के बाद झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज हुई। एफआईआर में अविमुक्तेश्वरानंद के अलावा उनके शिष्य मुकुंदानंद और कुछ अज्ञात लोगों को भी आरोपी बनाया गया है।
माघ मेला और महाकुंभ का संदर्भ क्यों अहम?
माघ मेला और महाकुंभ जैसे बड़े धार्मिक आयोजनों में लाखों श्रद्धालु और साधु-संत जुटते हैं। ऐसे में किसी भी आरोप का असर सिर्फ एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि धार्मिक संस्थाओं और आयोजन की छवि पर भी पड़ता है। इसलिए पुलिस जांच को संवेदनशील और साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ा रही है।
आगे क्या?
पुलिस की अगली रणनीति पूछताछ और सबूतों के सत्यापन पर टिकी है। हाईकोर्ट में संभावित याचिका और जांच एजेंसी को लेकर उठी मांगें इस केस को कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तर पर चर्चाओं में बनाए हुए हैं।
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