
नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र की कार्यवाही से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को पत्रकारों को संबोधित किया और इसे राष्ट्र के लिए एक “गौरवपूर्ण और विजयोत्सव का सत्र” बताया। प्रधानमंत्री ने रक्षा, अर्थव्यवस्था, विज्ञान, आतंकवाद और नक्सलवाद जैसे अहम मुद्दों पर अपने विचार साझा करते हुए देश की उपलब्धियों का उल्लेख किया।
ऑपरेशन सिंदूर भारत की सैन्य ताकत का प्रदर्शन
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में हाल ही में संपन्न हुए “ऑपरेशन सिंदूर” की सफलता पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि इस अभियान में भारतीय सेना ने 100 फीसदी लक्ष्य प्राप्त किया। “हमने आतंकी आकाओं के घर जाकर सिर्फ 22 मिनट में उनके ठिकानों को जमींदोज कर दिया। यह मेड इन इंडिया सैन्यशक्ति की नई तस्वीर है,” उन्होंने कहा। पीएम ने बताया कि इस ऑपरेशन ने वैश्विक स्तर पर भारत की रक्षा क्षमता और तकनीक में आत्मनिर्भरता को मजबूत किया है।
भारतीय तिरंगा पहली बार अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर
प्रधानमंत्री ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत की प्रगति को रेखांकित करते हुए बताया कि पहली बार भारतीय तिरंगा अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर लहराया गया, जो देश के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि यह घटना विज्ञान और नवाचार में देश की बढ़ती शक्ति का प्रमाण है और इससे युवाओं में नई ऊर्जा और प्रेरणा का संचार हुआ है।
नक्सलवाद पर लगाम, ‘रेड कॉरिडोर’ बना ‘ग्रीन ग्रोथ जोन’
पीएम मोदी ने कहा कि देश में लंबे समय से चली आ रही हिंसक गतिविधियों — खासकर आतंकवाद और नक्सलवाद — पर प्रभावी नियंत्रण हुआ है। “आज माओवादी इलाकों का दायरा तेजी से सिमट रहा है और सैकड़ों जिले हिंसा से मुक्त होकर विकास की ओर अग्रसर हैं,” उन्होंने कहा। उन्होंने यह भी जोड़ा कि आज भारत का संविधान हिंसा के आगे जीत रहा है।
भारत तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था की ओर अग्रसर
अर्थव्यवस्था पर बोलते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि 2014 से पहले भारत वैश्विक अर्थव्यवस्था में 10वें स्थान पर था, जबकि अब यह तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर तेजी से बढ़ रहा है। उन्होंने इस प्रगति को “देशवासियों की मेहनत और सरकार की सही नीतियों” का परिणाम बताया।
संसद सत्र केवल विधायी कार्य नहीं, बल्कि राष्ट्र गौरव का उत्सव
अपने संबोधन के अंत में पीएम मोदी ने कहा, “यह मानसून सत्र केवल कानून बनाने का अवसर नहीं, बल्कि भारत की उपलब्धियों और राष्ट्रीय गौरव को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने का उत्सव है। संसद और देश के नागरिक मिलकर इस गौरवगाथा का यशगान करें।”
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