
पटना। बिहार विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक पारा चढ़ चुका है। एनडीए और इंडिया गठबंधन आमने-सामने हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में जेडीयू-बीजेपी की सरकार को राहुल गांधी और तेजस्वी यादव खुली चुनौती दे रहे हैं। इस बीच बीजेपी ने एक बड़ा मास्टरस्ट्रोक खेला है—मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को बिहार की सियासत में उतारकर। पार्टी का मकसद साफ है—यादव वोट बैंक को साधना और लालू-तेजस्वी की काट पेश करना।
पटना में यादव समाज के सम्मेलन से चुनावी शंखनाद
रविवार को पटना में अखिल भारतीय यादव महासभा बिहार के तत्वावधान में भगवान श्रीकृष्ण के विचारों का जनसमरस सांस्कृतिक सम्मेलन हुआ। डॉ. मोहन यादव ने दीप प्रज्ज्वलित कर इसका शुभारंभ किया और सम्मानित हुए।
सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा,
“चंद्रगुप्त, अशोक जैसे महान सम्राटों की कर्मभूमि, बुद्ध और महावीर की तपोभूमि, नालंदा व विक्रमशिला की ज्ञान भूमि, बिहार ने हर काल में अपनी अमिट छाप छोड़ी है। यह राज्य ज्ञान, धर्म और अपनी समृद्ध विरासत के लिए जाना जाता है।”
‘भोजपुरी थोड़ी हमारी भी’ – मोहन यादव
सीएम मोहन यादव ने बिहार और मध्यप्रदेश के ऐतिहासिक रिश्तों का जिक्र करते हुए कहा, “राजा भोज भी बिहार आए थे। इसलिए भोजपुरी थोड़ी हमारे यहां की भी है। पूरे देश में भगवान कृष्ण के नाम पर कोई राज्य है तो वह बिहार ही है।” उन्होंने आगे कहा कि उनकी सरकार पूरे प्रदेश में गीता भवन बनवा रही है और जहां-जहां भगवान कृष्ण की लीला हुई, उन्हें तीर्थ स्थलों में बदलने का काम चल रहा है।
कृष्ण जन्मभूमि पर बड़ा बयान
मथुरा की कृष्ण जन्मभूमि का जिक्र करते हुए मोहन यादव ने कहा, “सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद भगवान राम अयोध्या में मुस्करा रहे हैं, तो जमुनाजी का कृष्ण कन्हैया ने क्या बिगाड़ा है, वो भी आनंद आएगा।”
भाजपा नेताओं से मुलाकात और भोजपुरी अंदाज में ट्वीट
पटना प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री मोहन यादव पूर्व राज्यपाल गंगा प्रसाद और उनके पुत्र विधायक संजीव श्रीवास्तव के निवास पर पहुंचे। वहां उनका गर्मजोशी से स्वागत हुआ। कई जनप्रतिनिधियों ने उनसे सौजन्य भेंट की।
अपने एक्स (ट्विटर) हैंडल पर उन्होंने भोजपुरी में लिखा,
“आज पटना, बिहार में परंपरागत भोजन दही-चूड़ा के आनंद उठवनी। एह अवसर पर वरिष्ठ भाजपा नेता आ पूर्व राज्यपाल श्री गंगा प्रसाद जी के आशीर्वाद मिलल। संगे-संगे बिहार विधानसभा के सभापति नंदकिशोर यादव जी से भी सौजन्य भेंट भइल।”
क्यों है मोहन यादव पर बीजेपी का दारोमदार
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बीजेपी ने बिहार में यादव वोट बैंक में सेंध लगाने के लिए मोहन यादव को सामने लाकर बड़ा दांव खेला है। मध्यप्रदेश में यादव समुदाय से आने वाले मुख्यमंत्री का चेहरा लालू-तेजस्वी की राजनीति को सीधी टक्कर दे सकता है। आने वाले महीनों में उनका लगातार बिहार दौरा इस रणनीति को और मजबूत करेगा।
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