
डिप्रेशन की पहचान अब सिर्फ सवाल-जवाब या लंबी टेस्ट रिपोर्ट तक सीमित नहीं रहेगी। अब आपकी आवाज़ और बोलने का तरीका भी बता सकेगा कि आप मानसिक रूप से कैसा महसूस कर रहे हैं। दिल्ली के की नई रिसर्च में सामने आया है कि स्पीच एनालिसिस (Speech Analysis) के ज़रिए डिप्रेशन के शुरुआती संकेतों को पहचाना जा सकता है — वो भी करीब 78% सटीकता के साथ।
AIIMS की स्पीच हेल्थ लैब में हुआ बड़ा खुलासा
एम्स के साइकियाट्री विभाग के डॉ. नंद कुमार के मुताबिक, कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) के CSR सहयोग से AIIMS में एक अत्याधुनिक स्पीच हेल्थ लैब बनाई गई है। यहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से इंसान की आवाज़ के टोन, एनर्जी, रुकावटें और भावनात्मक उतार-चढ़ाव का विश्लेषण किया जाता है। पिछले दो सालों में इस लैब में 423 लोगों के स्पीच सैंपल और उनके मानसिक स्वास्थ्य डेटा का अध्ययन किया गया — और पाया गया कि डिप्रेशन के मरीजों की आवाज़ में खास तरह के पैटर्न होते हैं।
78% सटीकता का मतलब क्या है?
शोधकर्ताओं के अनुसार, 78% Accuracy का अर्थ है कि हर 100 लोगों में से 78 मामलों में यह तकनीक सही बता सकी कि व्यक्ति डिप्रेशन में है या नहीं। यह डॉक्टर की जगह नहीं लेगी, लेकिन शुरुआती चेतावनी (Early Warning System) बन सकती है ताकि समय रहते इलाज शुरू हो सके।
डिप्रेशन: एक वैश्विक खतरा
दुनिया भर में इस समय 26 करोड़ से ज्यादा लोग डिप्रेशन से जूझ रहे हैं। भारत में 2015 के National Mental Health Survey के मुताबिक हर 20 में से 1 भारतीय (करीब 5.3%) अपने जीवन में कभी न कभी डिप्रेशन का सामना करता है। डिप्रेशन की सबसे गंभीर जटिलता आत्महत्या है — इसलिए समय पर पहचान बेहद जरूरी है।
कॉलेज स्टूडेंट्स में हालात और चिंताजनक
कॉलेज और यूनिवर्सिटी छात्रों में मानसिक तनाव तेजी से बढ़ रहा है। बेंगलुरु स्थित के एक बड़े अध्ययन (जो Indian Journal of Psychological Medicine में प्रकाशित हुआ) के अनुसार:
8,542 छात्र (9 राज्यों के 15 शहरों की 30 यूनिवर्सिटीज़ से)
18.8% ने कभी न कभी आत्महत्या के विचार आने की बात कही
12.4% ने पिछले एक साल में ऐसे विचार बताए
6.7% ने आत्महत्या का प्रयास किया
33.6% में मध्यम से गंभीर डिप्रेशन
23.2% में गंभीर एंग्जायटी
केवल 38.1% छात्रों ने अपनी परेशानी किसी से साझा की — ज़्यादातर दोस्तों से
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