
नई दिल्ली। संसद भवन में मंगलवार को देश के दूसरे सबसे बड़े पद के लिए बड़ा राजनीतिक रण छिड़ने जा रहा है। उपराष्ट्रपति पद के चुनाव के लिए वोटिंग और मतगणना दोनों एक ही दिन होंगी। मुकाबला सीधा है – एनडीए उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन और इंडिया ब्लॉक उम्मीदवार, न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) बी. सुदर्शन रेड्डी के बीच।
इस चुनाव में कुल 782 सांसद (लोकसभा और राज्यसभा सदस्य) वोट डालने के पात्र हैं। यही सांसद तय करेंगे कि अगला उपराष्ट्रपति कौन होगा।
संविधान और प्रक्रिया क्या कहती है?
संविधान के अनुच्छेद 66 (1) के अनुसार, उपराष्ट्रपति का चुनाव संसद के निर्वाचक मंडल द्वारा होता है। इस बार मतदान संसद भवन के वसुधा स्थित कमरा नंबर F-101 में होगा।
➡️ मतदान समय: सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक
➡️ मतगणना: शाम 6 बजे से शुरू
➡️ परिणाम: तुरंत बाद घोषित किया जाएगा
भारतीय निर्वाचन आयोग को अनुच्छेद 324 के तहत यह चुनाव कराने की जिम्मेदारी दी गई है।
बैलेट पेपर से होगा मतदान
लोकसभा के पूर्व महासचिव पीडीटी आचार्य ने समझाया, “यह प्रक्रिया आम चुनाव जैसी ही है। फर्क सिर्फ इतना है कि यहां ईवीएम नहीं, बैलेट पेपर का इस्तेमाल होता है। मतपत्र पर उम्मीदवारों के नाम वर्णानुक्रम में छपते हैं। सांसद रिटर्निंग ऑफिसर से मतपत्र लेकर केबिन में जाएंगे और गुप्त मतदान करेंगे।” उन्होंने यह भी साफ किया कि “उम्मीदवार केवल तभी वोट डाल सकते हैं जब वे स्वयं सांसद हों। अगर वे सांसद नहीं हैं तो वे मतदान नहीं कर सकते।”
पारदर्शिता के कड़े इंतजाम
➡️ मतदान कक्ष में रिटर्निंग ऑफिसर मौजूद रहेंगे।
➡️ उम्मीदवार का एक प्रतिनिधि भी वहां रह सकता है और प्रक्रिया पर नजर रख सकता है।
➡️ चुनाव आयोग के पर्यवेक्षक पूरे मतदान और गिनती की निगरानी करेंगे।
अगर किसी भी प्रकार की अनियमितता होती है तो उम्मीदवार का प्रतिनिधि तुरंत आपत्ति दर्ज करा सकता है।
संख्या बल किसके पक्ष में?
लोकसभा और राज्यसभा की मौजूदा स्थिति को देखें तो एनडीए आगे दिख रहा है।
➡️ लोकसभा: एनडीए – 293 सदस्य, विपक्ष – 234 सदस्य
➡️ राज्यसभा: एनडीए – 132 सदस्य, विपक्ष – 77 सदस्य
यानी गणित एनडीए के उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन के पक्ष में झुका हुआ है।
दलों की रणनीति
भाजपा ने रविवार को अपने सांसदों के लिए दो दिवसीय कार्यशाला शुरू की थी, ताकि वोटिंग में कोई गलती न हो।
इंडिया ब्लॉक ने सोमवार को संसद के सेंट्रल हॉल में बैठक की। इसे मतदान से पहले एकता का प्रदर्शन माना जा रहा है।
क्यों हो रहा चुनाव?
जुलाई में उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देकर इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने 21 जुलाई को पद छोड़ा, जबकि उनका कार्यकाल 2027 तक था। धनखड़ ने अगस्त 2022 में पदभार संभाला था।
उनके इस्तीफे के बाद से यह पद खाली पड़ा है और अब देश को नया उपराष्ट्रपति मिलने जा रहा है।
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