
कोलंबो/नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने थाईलैंड दौरे के बाद शुक्रवार देर शाम श्रीलंका की राजधानी कोलंबो पहुंचे। जहां बारिश के बावजूद भारतीय समुदाय के लोगों ने पूरे जोश और उल्लास के साथ उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। कोलंबो के इंडियन हाउस में हुए सांस्कृतिक कार्यक्रम में भारतीय मूल के लोगों ने पारंपरिक परिधानों में नृत्य और गीतों के जरिए मोदी का अभिनंदन किया।
राजकीय सम्मान के साथ हुआ स्वागत
5 अप्रैल, शनिवार को प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत कोलंबो के इंडिपेंडेंस स्क्वायर में गार्ड ऑफ ऑनर के साथ किया गया। श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमार दिसानायके स्वयं इस दौरान मौजूद रहे। पीएम मोदी के दौरे को दोनों देशों के बीच बढ़ते रणनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक संबंधों का प्रतीक माना जा रहा है।
भारत-श्रीलंका संबंधों में आएगा नया मोड़: दौरे की मुख्य बातें
◉ रक्षा समझौते की ओर बड़ा कदम
हिंद महासागर क्षेत्र में चीन की बढ़ती सक्रियता को संतुलित करने के लिए भारत और श्रीलंका रक्षा सहयोग को मज़बूत करने की दिशा में अग्रसर हैं। इस दौरे में दोनों देशों के बीच एक रणनीतिक रक्षा समझौते पर चर्चा के साथ-साथ, नौसेना सहयोग, साझा अभ्यास, और डाटा शेयरिंग जैसे मुद्दों पर सहमति बन सकती है।
◉ आर्थिक सहयोग: संकट से उबारने की पहल
2022 के भीषण आर्थिक संकट के बाद से श्रीलंका अब भी पुनर्निर्माण की प्रक्रिया में है। भारत, जो पहले ही श्रीलंका को 4 बिलियन डॉलर से अधिक की सहायता प्रदान कर चुका है, अब नई वित्तीय सहायता योजनाओं और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में साझेदारी की संभावनाएं तलाश रहा है।
◉ ऊर्जा साझेदारी: सौर ऊर्जा से जुड़ेगा त्रिंकोमाली
भारत और श्रीलंका के बीच त्रिंकोमाली में 120 मेगावॉट के सौर ऊर्जा संयंत्र की स्थापना पर सहमति बनने की संभावना है। भारत के NTPC और श्रीलंका के Ceylon Electricity Board के बीच इस साझेदारी से श्रीलंका की ऊर्जा जरूरतें पूरी होंगी और भारत की ग्रीन एनर्जी नीति को भी बल मिलेगा।
◉ व्यापार और स्वास्थ्य के क्षेत्र में नई संभावनाएं
मोदी और दिसानायके के बीच ट्रेड, हेल्थकेयर, फार्मास्युटिकल सप्लाई, और मेडिकल टूरिज्म जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने को लेकर बातचीत होगी। डिजिटल हेल्थ मिशन और टेलीमेडिसिन जैसे विषयों पर संयुक्त पहल की योजना भी इस दौरे का हिस्सा है।
सांस्कृतिक संबंधों को भी मिलेगा नया आयाम
श्रीलंका के बौद्ध विरासत से भारत का गहरा संबंध रहा है। पीएम मोदी अनुराधापुर स्थित प्रमुख बौद्ध स्थलों का दौरा कर सकते हैं और वहां बौद्ध सांस्कृतिक आदान-प्रदान केंद्र की घोषणा भी संभव है।
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