
नई दिल्ली। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन अपना दो दिवसीय दौरा पूरा कर लौट गए हैं, लेकिन पीछे छोड़ गए हैं एनर्जी से लेकर स्पेस तक भारत की तस्वीर बदल देने वाले 19 समझौते। सवाल ये है—इन डील्स से आम भारतीय की ज़िंदगी पर क्या असर पड़ेगा?
1) एनर्जी सेक्टर में बड़ा भरोसा: तेल-गैस से परमाणु ऊर्जा तक
रूस ने ऐलान किया है कि वह भारत को कच्चा तेल, नैचुरल गैस, रिफाइनिंग पेट्रोकेमिकल और न्यूक्लियर सेक्टर में सप्लाई जारी रखेगा। पश्चिमी देशों के दबाव के बावजूद इसका मतलब साफ है—भारत-रूस एनर्जी पार्टनरशिप और मजबूत होगी और भारत रूस से तेल खरीदना जारी रख सकेगा।
2) सिविल न्यूक्लियर में गेम-चेंजर: छोटे रिएक्टर, बड़ा लक्ष्य
कोयले पर निर्भरता घटाने की दिशा में भारत का बड़ा कदम—छोटे न्यूक्लियर रिएक्टर प्लांट्स। रूस इस तकनीक में दुनिया में अग्रणी माना जाता है और अब भारत को सहयोग देगा।
लक्ष्य: साल 2047 तक 100 गीगावाट बिजली छोटे न्यूक्लियर रिएक्टर्स से।
वर्तमान स्थिति: अभी सिर्फ 8 गीगावाट।
यह डील भारत के एनर्जी फ्यूचर को तेज रफ्तार दे सकती है।
3) ट्रेड टारगेट 100 अरब डॉलर: लेकिन घाटा भी बड़ा
दोनों देशों ने आपसी व्यापार को 100 अरब डॉलर (करीब 9 लाख करोड़ रुपये) तक ले जाने का लक्ष्य रखा है।
मौजूदा सालाना व्यापार: 5.80 लाख करोड़ रुपये
भारत का आयात: 5.39 लाख करोड़
भारत का निर्यात: 41 हजार करोड़
घाटा बड़ा है, लेकिन नया रोडमैप व्यापार संतुलन सुधारने की उम्मीद जगाता है।
4) रूस में भारतीयों के लिए नौकरियां: सालाना 10 लाख मौके!
रूस क्षेत्रफल में सबसे बड़ा देश, लेकिन आबादी महज 15 करोड़—वर्कफोर्स की किल्लत से जूझ रहा है।
बड़ा ऐलान: रूस भारत के लोगों को काम के नए मौके देगा—यहां तक कि साल में 10 लाख भारतीयों को नौकरी देने के लिए भी तैयार है। यह भारतीय युवाओं के लिए सुनहरा मौका बन सकता है।
5) हथियार अब ‘खरीद’ नहीं, ‘निर्माण’: मेक इन इंडिया को बूस्ट
अब भारत रूस से सिर्फ हथियार खरीदेगा नहीं, साथ मिलकर बनाएगा।
फोकस रहेगा—R&D, को-डेवलपमेंट और को-प्रोडक्शन पर।
उदाहरण: ब्रह्मोस मिसाइल जैसी साझेदारी।
मतलब—तकनीक ट्रांसफर, स्थानीय निर्माण और रक्षा आत्मनिर्भरता।
6) स्पेस में इंडिया-रशिया की जुगलबंदी
स्पेस सेक्टर में इंसानों को भेजने के मिशन पर दोनों देश साथ काम करेंगे।
साथ ही सहयोग बढ़ेगा—
नेविगेशन
डीप स्पेस मिशन
रॉकेट इंजन डेवलपमेंट
भारत की अंतरिक्ष उड़ान अब और ऊंची होगी।
7) UNSC की कुर्सी और BRICS की कमान
राष्ट्रपति पुतिन ने वादा किया कि वे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत को स्थायी सीट देने का समर्थन करते हैं। इसके अलावा, रूस 2026 में BRICS की अध्यक्षता भारत को देने का समर्थन भी कर रहा है।
8) आतंकवाद पर सख्त साझेदारी और करेंसी में कारोबार
आतंकवाद के खिलाफ दोनों देशों की एकजुटता भी पुख्ता हुई। राष्ट्रपति पुतिन ने साफ कहा, “वो आतंकी फंडिंग को रोकने और उन पर प्रतिबंध लगाने के लिए भारत के साथ मिल कर काम करेंगे।” इसके साथ ही यह भी तय हुआ कि भारत-रूस व्यापार अधिक से अधिक रुपये-रूबल में होगा। फिलहाल 96% व्यापार इसी सिस्टम में हो रहा है। (डिजिटल करेंसी प्लेटफॉर्म पर बातचीत नहीं हुई।)
9) नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर: समय और पैसे की बचत
अब बनेगा इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर—
रूट: मुंबई → ईरान का चाबहार पोर्ट → ईरान का उत्तरी छोर → समुद्र के रास्ते रूस
फायदा:
अभी माल पहुंचाने में 30–35 दिन
कॉरिडोर बनने पर 20–25 दिन
यानी तेज लॉजिस्टिक्स, सस्ता कारोबार।
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