
भारत ने उत्तर-पूर्वी राज्यों में रेलवे नेटवर्क विस्तार पर जोर बढ़ा दिया है। इसका उद्देश्य सिर्फ क्षेत्रीय कनेक्टिविटी बढ़ाना नहीं बल्कि चीन, भूटान और म्यांमार की सीमाओं तक मजबूत रेल नेटवर्क खड़ा कर रणनीतिक सुरक्षा को पुख्ता करना भी है। इससे सीमावर्ती इलाकों में व्यापार के नए अवसर भी खुलेंगे।
रेल मंत्रालय के अनुसार उत्तर-पूर्व में 77 हजार करोड़ रुपये की विशाल रेल परियोजनाएं चल रही हैं। चालू वित्तीय वर्ष के लिए 10,440 करोड़ रुपये का बजट तय किया गया है।
मिजोरम में नई शुरुआत
हाल ही में 51 किमी लंबी बैराबी-सैरांग लाइन शुरू होने से ट्रेन अब मिजोरम की राजधानी आइजोल तक पहुंच चुकी है। यह पहली बार है जब राज्य राजमार्गों के साथ सीधे रेल से भी जुड़ गया है।
अरुणाचल प्रदेश—चीन सीमा तक रेल
अरुणाचल में नई लाइनें तेजी से बन रही हैं। मुरकोंगसेलेक-पासीघाट प्रोजेक्ट में 15.6 किमी मुरकोंगसेलेक-सिले लाइन अक्टूबर तक और 10.55 किमी सिले-पासीघाट लाइन फरवरी 2026 तक शुरू हो सकती है। तवांग, पासीघाट-परशुराम कुंड-वाकरो और बामे-आलो-मेचुका तक नई रेल लाइनों के लिए अंतिम स्थान सर्वेक्षण (FLS) पूरा हो चुका है। ये सभी स्थान चीन सीमा के बेहद करीब हैं।
मणिपुर—म्यांमार सीमा तक ट्रैक
मणिपुर में 110.6 किमी लंबी जिरीबाम-इंफाल रेल लाइन पर तेजी से काम हो रहा है। जिरीबाम-वांगाईचुंगपाओ और वांगाईचुंगपाओ-खोंगसांग खंड पहले ही चालू हैं।
➡️ खोंगसांग-अवांगखुल (9.1 किमी) मार्च 2026
➡️ अवांगखुल-नोनी (9.15 किमी) मार्च 2027
➡️ नोनी-इंफाल (37.02 किमी) मार्च 2028 तक तैयार होने की उम्मीद
सिक्किम—पहली बार रेल कनेक्टिविटी
सिक्किम में 44.96 किमी लंबी सेवोक-रंगपो लाइन का निर्माण तेजी से जारी है। दिसंबर 2027 तक इसके पूरा होने का लक्ष्य है। यह सिक्किम को पहली बार भारतीय रेल से सीधे जोड़ेगा।
नगालैंड—कोहिमा तक पहुंच
नगालैंड की दीमापुर-कोहिमा लाइन का काम प्रगति पर है। धनसिरी-शोखुवी खंड 2021 में चालू हुआ।
शोखुवी-मोल्वोम: मार्च 2025
मोल्वोम-फेरिमा: अक्टूबर 2026
फेरिमा-जुब्जा (कोहिमा के पास): दिसंबर 2029 तक पूरा होने का अनुमान
त्रिपुरा—बांग्लादेश सीमा तक रेल
अगरतला-सबरूम लाइन 2016-19 में पूरी हो चुकी है। अब नेटवर्क का पूरा विद्युतीकरण हो चुका है और अगरतला तक दोहरीकरण की योजना पर काम जारी है।
चीन की रेल चुनौती
कुछ दिन पहले चीन ने तिब्बत-शिनजियांग के बीच 2000 किमी लंबी नई रेल लाइन बनाने का एलान किया। यह लाइन भारत के अक्साई चिन क्षेत्र के बेहद नजदीक से गुजरेगी और एलएसी (वास्तविक नियंत्रण रेखा) तक पहुंच देगी। इससे चीनी सेना को तेजी से तैनात होने में मदद मिलेगी। भारत ने इस खतरे को भांपते हुए अपने उत्तर-पूर्वी रेल प्रोजेक्ट्स की रफ्तार बढ़ा दी है। यह न सिर्फ सुरक्षा बल्कि पूर्वोत्तर को मुख्यधारा की अर्थव्यवस्था से जोड़ने का बड़ा कदम माना जा रहा है।
भारत की यह मेगा रेलवे रणनीति सिर्फ विकास का प्रतीक नहीं, बल्कि पड़ोसी देशों के बढ़ते दबाव का ठोस जवाब भी है। आने वाले वर्षों में उत्तर-पूर्व का हर कोना रेल पटरियों से जुड़कर नए युग की शुरुआत करेगा।
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